बौराड़ी स्टेडियम में रामलीला मंचन का तीसरा दिन: राम, लक्ष्मण, सीता चले वनवास को

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नई टिहरी * गढ़ निनाद

बौराड़ी स्टेडियम में रामलीला के तीसरे भी बड़ी संख्या में दर्शकों ने रामलीला का आनंद लिया।दर्शक तब भावुक हो गए जब कैकेयी राजा दशरथ से राम के लिए चौदह वर्ष का वनवास का वरदान मांगती है। जिसके बाद राम-सीता व लक्ष्मण वनवास को चले जाते हैं।

रामलीला में दशरथ-कैकयी संवाद व राम-लक्ष्मण संवाद का मंचन आकर्षण के केंद्र रहे। कैकेयी राजा दशरथ से राम के लिए चौदह वर्ष का वनवास का वरदान मांगती है, जिसके बाद राम-सीता व लक्ष्मण वनवास को चले जाते हैं। राम के वनवास जाने पर राजा दशरथ को भारी आघात लगता है। सीता राम के साथ वन चलने का आग्रह करती है, राम सीता को बहुत मनाते हैं, लेकिन वे नहीं मानती। जिसके बाद राम सीता को वन ले जाने के लिए तैयार हो जाते हैं।

वहीं दूसरी ओर लक्ष्मण राम के वनवास जाने की बात से क्रोधित हो जाते हैं, लेकिन राम के समझाने पर वह मान जाते हैं। साथ ही राम से वन जाने की आज्ञा मांगते हैं। इससे पहले राम, लक्ष्मण और सीता माता कौशल्या व सुमित्रा से वन जाने की आज्ञा लेते हैं। जिससे माताएं दुखी हो जाती हैं। राम के वन जाने पर राजा दशरथ अत्यंत व्यथित हो जाते हैं और मंत्री सुमंत को राम, सीता व लक्ष्मण को वन में ले जाकर वापस घर लाने की आज्ञा देते हैं। इसके बाद कैकेयी राम को वनवासी वस्त्र धारण के लिए पीले वस्त्र देती है। राम, लक्ष्मण व सीता वनवासी वस्त्र धारण कर वन के लिए प्रस्थान करते हैं। इसके बाद तीनों सुमंत के साथ नदी तट पर पहुंचते हैं, जहां केवट उन्हें नाव से नदी पार करवाते हैं।


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