गैरसैंण विधान भवन में दो दिवसीय छात्र संसद-2025 का शुभारंभ

चमोली 26 मार्च 2025 । उत्तराखंड के गैरसैंण स्थित विधान भवन में आज 26 मार्च 2025 को दो दिवसीय छात्र संसद-2025 का शुभारंभ हुआ। यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय संसदीय अध्ययन, शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान, विधान भवन, गैरसैंण द्वारा सीमांत जनपद चमोली के छात्र-छात्राओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया और संसदीय कार्य प्रणाली से अवगत कराने के उद्देश्य से किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में माननीय अध्यक्ष विधानसभा उत्तराखंड श्रीमती ऋतु खण्डूडी भूषण वर्चुअल माध्यम से शामिल हुईं। श्रीमती ऋतु खण्डूडी भूषण ने श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय, बादशाहीथौल से संबद्ध विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि यह आयोजन माननीय प्रधानमंत्री जी के 01 लाख युवाओं को भविष्य का लीडर बनाने के संकल्प के तहत पहली बार आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “जनपद चमोली के छात्र-छात्राओं को इस कार्यक्रम से न केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समझने का अवसर मिलेगा, बल्कि वे संसदीय कार्य प्रणाली से भी परिचित होंगे। छात्र-छात्राएं हमारे देश का भविष्य हैं और स्थानीय स्तर से लेकर राज्य व राष्ट्रीय स्तर तक उन्हें अग्रिम पंक्ति में लाने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।” उन्होंने राज्य सरकार की छात्रोपयोगी योजनाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने घोषणा की कि जल्द ही उत्तराखंड विधानसभा और श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) किया जाएगा, ताकि इस तरह के कार्यक्रम बड़े पैमाने पर आयोजित हो सकें।
विशिष्ट अतिथि के रूप में वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एन.के. जोशी ने कहा, “परंपरागत स्थानीय अनाजों के उत्पादन में वृद्धि और उत्तराखंड की कला व संस्कृति के संरक्षण से न केवल प्रदेश को आर्थिक रूप से मजबूत किया जा सकता है, बल्कि यह विकसित भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है।” उन्होंने चिंता जताई कि उत्तराखंड की समृद्ध लोकगाथाएं और परंपराएं विलुप्ति की कगार पर हैं, जिसके संरक्षण के लिए हर उत्तराखंडी को आगे आना होगा।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कर्णप्रयाग के प्राचार्य प्रो. बी.एन. खाली ने कहा, “छात्र-छात्राओं के सर्वांगीण विकास के लिए इस तरह के आयोजन राज्य सरकार की बड़ी उपलब्धि हैं।” उन्होंने इस पहल के लिए कुलपति प्रो. जोशी का आभार जताया।कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री दिनेश चंद्रा, नोडल अधिकारी डॉ. हेमंत बिष्ट और समन्वयक प्रो. बी.एन. खाली के साथ-साथ जजेस के रूप में डॉ. डी.एस. पुंडीर, श्री गिरीश डिमरी, श्री गिरीश नौटियाल और अन्य गणमान्य अतिथि वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे। गोपेश्वर, कर्णप्रयाग, गैरसैंण, नागनाथ पोखरी और नंदासैंण जैसे महाविद्यालयों के छात्र-छात्राएं और प्राचार्य भी इस अवसर पर मौजूद रहे।
यह आयोजन छात्रों को संसदीय प्रक्रिया का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने और उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।