देहरादून। उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण की मांग को लेकर देहरादून स्थित एकता विहार धरना स्थल पर चल रहा आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनोद प्रसाद रतुड़ी के नेतृत्व में पिछले 83 दिनों से जारी क्रमिक अनशन ने अब बड़े जनांदोलन का स्वरूप ले लिया है। सरकार की चुप्पी और प्रशासनिक उदासीनता से नाराज आंदोलनकारियों ने आगामी 31 मई को देहरादून में विशाल पदयात्रा और जल्द ही देहरादून से गैरसैंण तक ऐतिहासिक पैदल महामार्च निकालने का ऐलान किया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि गैरसैंण पहुंचकर आमरण अनशन शुरू किया जाएगा।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पूर्व आईएएस विनोद प्रसाद रतुड़ी ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने संविधान की प्रतियां दिखाते हुए कहा कि भारतीय संविधान में “अस्थायी राजधानी” जैसी किसी व्यवस्था का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 2, 3 और 12 के तहत कहीं भी यह उल्लेख नहीं मिलता कि किसी राज्य को वर्षों तक अस्थायी राजधानी के भरोसे चलाया जा सकता है। रतुड़ी ने सवाल उठाया कि आखिर किस कानूनी आधार पर उत्तराखंड की जनभावनाओं और पर्वतीय हितों की अनदेखी की जा रही है।
रतुड़ी ने सरकार को “गूंगी-बहरी” बताते हुए कहा कि उसे न अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की आवाज सुनाई देती है और न ही राज्य आंदोलन के शहीदों की भावना। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “अगर हुकूमत नहीं जगेगी, तो उसे जगाना हम अच्छे से जानते हैं। चाहे हम दो हों, तीन हों या अकेले ही क्यों न खड़े हों, गैरसैंण और उत्तराखंड के अधिकारों की लड़ाई आखिरी सांस तक लड़ेंगे।”
धरना देहरादून में दिए जाने के सवाल पर रतुड़ी ने कहा कि जब पहाड़ में आंदोलन हुआ तो आंदोलनकारियों पर मुकदमे लाद दिए गए और उनकी आवाज दबा दी गई। इसलिए राजधानी देहरादून में बैठकर सरकार तक अपनी बात पहुंचाना मजबूरी बनी। उन्होंने कहा कि अब आंदोलन केवल धरना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे गैरसैंण की धरती तक ले जाया जाएगा।
आंदोलन को युवा शक्ति का समर्थन भी मिल रहा है। उत्तराखंड क्रांति दल युवा प्रकोष्ठ के कोषाध्यक्ष सीए वरुण चंदोला, जो विशेष रूप से बागेश्वर से देहरादून पहुंचे हैं, ने कहा कि यह लड़ाई किसी राजनीतिक लाभ की नहीं, बल्कि राज्य आंदोलन के 42 शहीदों के सपनों की है। उन्होंने कहा कि देहरादून की सुविधाजनक राजनीति और प्रशासनिक मानसिकता गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनने से रोक रही है। “यह राज्य हमें किसी ने दान में नहीं दिया था। हमने संघर्ष करके इसे हासिल किया था और गैरसैंण भी संघर्ष से ही हासिल करेंगे,” उन्होंने कहा।
प्रेस वार्ता में कैप्टन राकेश ध्यानी, वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी प्रकाश थपलियाल, पूर्व युवा प्रदेश अध्यक्ष आम आदमी पार्टी सचिन थपलियाल, आनंद राम, पूर्व डीजीसीए निदेशक राजेंद्र प्रसाद, मनमोहन शर्मा, सुधीर गैरोला सहित कई आंदोलनकारी और बुद्धिजीवी उपस्थित रहे।
देहरादून से गैरसैंण तक पदयात्रा और आमरण अनशन का ऐलान, पूर्व IAS विनोद रतूड़ी बोले— नहीं जागे तो हम जगाएंगे

*** संक्षिप्त परिचय / बायोडाटा *** नाम: गोविन्द सिंह पुण्डीर संपादक: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल टिहरी। उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार। पत्रकारिता अनुभव: सन 1978 से सतत सक्रिय पत्रकारिता। विशेषता: जनसमस्याओं, सामाजिक सरोकारों, संस्कृति एवं विकास संबंधी मुद्दों पर गहन लेखन और रिपोर्टिंग। योगदान: चार दशकों से अधिक समय से प्रिंट व सोशल मीडिया में निरंतर लेखन एवं संपादन
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