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गज़ब: भरत ने हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से प्रयोगशाला में उगाये आलू के पौधे

Govind Pundir
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गढ़ निनाद समाचार* 25 फरवरी 2021।

नई टिहरी। राजकीय महाविद्यालय अगरोड़ा (धारमंडल) टिहरी गढ़वाल के वनस्पति विज्ञान विभाग के डॉ० भरत गिरी गोसाई द्वारा सीमित संसाधनों के बावजूद हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से प्रयोगशाला में आलू के पौध तैयार किये गये है। उन्होंने बताया कि हाइड्रोपोनिक्स बिना मिट्टी के जलीय घोल में नियंत्रित जलवायु में पौधे उगाने की आधुनिक तकनीक है। 

हाइड्रोपोनिक्स से विकसित पौधों का सर्वप्रथम उल्लेख फ्रांसिस बेकन ने अपनी पुस्तक ‘अ नेचुरल हिस्ट्री’ में वर्ष 1627 में किया था। यह दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती कृषि तकनीकी में से एक हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर समेत दुनिया के कई देशों में यह तकनीक का चलन काफी तेजी से बढ़ रहा है। सामान्यतः पेड़ पौधे आवश्यक पोषक तत्व मृदा से लेते हैं, लेकिन हाइड्रोपोनिक्स विधि में पौधे आवश्यक पोषक तत्व एक विशेष प्रकार के पानी के घोल से प्राप्त करते हैं। 

पौधों के उचित विकास एवं वृद्धि हेतु 16 आवश्यक तत्वों की आवश्यकता होती हैं, जिनमें कार्बन (C), हाइड्रोजन (H), ऑक्सीजन (O), नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), पोटेशियम (K), कैल्शियम (Ca), मैग्नीशियम (Mg), सल्फर (S), आयरन (Fe), मैंगनीज (Mn), तांबा (Cu), जिंक (Zn), क्लोरीन (Cl), मॉलीब्लेडिनम (Mo) तथा बोरोन (B) प्रमुख है। हाइड्रोपोनिक्स तकनीक में अच्छी पैदावार हेतु जलीय घोल का पी0एच0 स्तर 5.8 से 6.2, सामान्य तापमान 18 से 30 डिग्री सेल्सियस, 80 से 85% आद्रता एवं  न्यूनतम 6 घंटे दैनिक प्रकाश आवश्यक है। 

परंपरागत तकनीक से पौधे और फसल उगाने की अपेक्षा हाइड्रोपोनिक्स तकनीक के कई लाभ हैं। इस तकनीकी में उन क्षेत्रों में भी पौधे, फसल तथा सब्जियां उगाई जा सकती है, जहां जमीन की कमी है, अथवा वहां की मिट्टी उपजाऊ नहीं है। परंपरागत बागवानी की अपेक्षा हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से बागवानी करने पर पानी की 20% तक बचत होती है। जिससे सिंचाई प्रणाली में अतिरिक्त दबाव से छुटकारा भी मिलता है। 

शोध द्वारा ज्ञात हुआ है कि परंपरागत खेती में 1 किलोग्राम टमाटर उगाने के लिए लगभग 30 लीटर पानी की आवश्यकता होती है, किंतु हाइड्रोपोनिक्स में केवल 10 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। इस तकनीक में उर्वरक, कीटनाशक या अन्य रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है, जिसका फायदा न केवल पर्यावरण को होता है बल्कि हमारे स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। इस तकनीक से उगाई गई सब्जियां की पैदावार परंपरागत विधि से कई गुना अधिक होती हैं, जो कि पौष्टिक भी होती है। शहरी क्षेत्रों  मे यह तकनीक बहुत ज्यादा अपनाई जा रही है। दरअसल शहरीकरण व बढ़ती आबादी के कारण जमीन की कमी होती जा रही है। इस तकनीक का प्रयोग करके घर के किसी भी कोने में, छत पर बडे आसानी से सब्जियां उगा सकते हैं। 

आमतौर पर हाइड्रोपोनिक्स कृषि प्रणाली में टमाटर, खीरा, पालक, बैगन, शिमला मिर्च, करेला, आलू आदि सब्जियों का उत्पादन किया जा रहा है। हाइड्रोपोनिक्स तकनीक की कुछ चुनौतियां भी हैं । परंपरागत विधि की अपेक्षा हाइड्रोपोनिक्स तकनीक में अधिक खर्च आता है। पौधों की उचित पैदावार के लिए आवश्यक खनिज व पोषक तत्त्व सही समय पर सही मात्रा में मिलते रहना चाहिए।


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*** संक्षिप्त परिचय / बायोडाटा *** नाम: गोविन्द सिंह पुण्डीर संपादक: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल टिहरी। उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार। पत्रकारिता अनुभव: सन 1978 से सतत सक्रिय पत्रकारिता। विशेषता: जनसमस्याओं, सामाजिक सरोकारों, संस्कृति एवं विकास संबंधी मुद्दों पर गहन लेखन और रिपोर्टिंग। योगदान: चार दशकों से अधिक समय से प्रिंट व सोशल मीडिया में निरंतर लेखन एवं संपादन वर्तमान कार्य: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को नई दिशा प्रदान करना।
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