महानिदेशक, ICFRI ने वन अनुसंधान संस्थान में कोयला खनन पुनर्वास पर प्रशिक्षण का उद्घाटन किया

Govind Pundir
2 Min Read
खबर को सुनें

देहरादून। श्री अरुण सिंह रावत, महानिदेशक, आईसीएफआरई व निदेशक, एफआरआई देहरादून ने ‘पर्यावरण प्रभाव आकलन और पर्यावरण प्रबंधन योजनाओं के विशेष संदर्भ में वन और वन्य जीव संरक्षण’ पर चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया। यह प्रशिक्षण सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (सीएमपीडीआईएल), रांची, झारखंड के अधिकारियों के लिए आयोजित किया गया था।

श्री रावत ने पिछली शताब्दी के दौरान खान पुनर्वास के लिए आईसीएफआरई द्वारा की गई महत्वपूर्ण पहलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी बताया कि आईसीएफआरई के अंतर्गत संस्थान  न केवल वन विभागों, बल्कि वन आधारित उद्योगों, खनन उद्योगों और रक्षा सहित अन्य सरकारी विभागों को भी अनुसंधान और तकनीकी सहायता प्रदान करते हैं। वन अनुसंधान संस्थान ने देश के विभिन्न राज्यों में खनन से प्रभावित क्षेत्रों के पुनरुद्धार के लिए उल्लेखनीय काम किया है।

इसके अतिरिक्त, वन अनुसंधान संस्थान के पास वानिकी से संबंधित विभिन्न विषयों के साथ-साथ पर्यावरण प्रभाव आकलन, पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण, सतत विकास और खनन भूमि पुनरुद्धार जैसे विषयों में प्रशिक्षण आयोजित करने का लंबा अनुभव है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित विशेष अतिथि श्री शेखर सरन, पूर्व-सीएमडी, सीएमपीडीआईएल ने कोयला खदान और भविष्य की संभावनाओं के बारे में अपने ज्ञान और अनुभव को साझा किया। श्री अभिजीत सिन्हा, महाप्रबंधक, सीएमपीडीआईएल ने सभा को संबोधित करते हुये कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण को नियमित रूप से आयोजित करने से सीएमपीडीआईएल के अधिकारियों के कौशल को बढ़ाने, उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

कार्यक्रम में श्री सुधीर कुमार, डीडीजी विस्तार, एडीजी ईआईए, एडीजी, मीडिया एवं विस्तार, समूह समन्वयक अनुसंधान, सभी प्रभाग प्रमुखों के साथ-साथ वन पारिस्थितिकी एवं जलवायु परिवर्तन प्रभाग के वैज्ञानिकों, अधिकारीगण उपस्थित थें। कार्यक्रम का अंत डॉ. तारा चंद के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ। 

Share This Article
Follow:
*** संक्षिप्त परिचय / बायोडाटा *** नाम: गोविन्द सिंह पुण्डीर संपादक: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल टिहरी। उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार। पत्रकारिता अनुभव: सन 1978 से सतत सक्रिय पत्रकारिता। विशेषता: जनसमस्याओं, सामाजिक सरोकारों, संस्कृति एवं विकास संबंधी मुद्दों पर गहन लेखन और रिपोर्टिंग। योगदान: चार दशकों से अधिक समय से प्रिंट व सोशल मीडिया में निरंतर लेखन एवं संपादन वर्तमान कार्य: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को नई दिशा प्रदान करना।
error: Content is protected !!