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राजस्थान में ज्योतिष एवं विज्ञान पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर विशिष्ट अतिथि ज्योतिषाचार्य डॉ घिल्डियाल का उत्तराखंड लौटने पर भव्य स्वागत

Garhninad Desk
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ऋषिकेश। राजस्थान में अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष वेद विज्ञान अनुसंधान संस्थान द्वारा ज्योतिष एवं विज्ञान पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी में उत्तराखंड ज्योतिष रत्न आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल को अति विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। राजस्थान से लौटने पर उनके अनुयायियों ने उनका भव्य स्वागत किया। कल हंस फाउंडेशन प्रभारी आवास पर पहुंचकर उनका विशेष स्वागत सत्कार करेंगे।

कार्यक्रम में अति विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड की धरती सभी वेदों पुराणों एवं विशेष रूप से ज्योतिष की जननी है इसलिए शंकराचार्य जी ने देश के चार मठों में यहां पर ज्योतिष मठ की स्थापना की जिसे कालांतर में लोग जोशीमठ के नाम जानने लगे उन्होंने यह भी कहा कि कैलाश पर्वत में घटी घटना के बाद गणेश जी पर हाथी की सूंड लगाने का मामला रहा हो अथवा हरिद्वार कनखल में दक्ष प्रजापति पर बकरे का मुंह लगाने का प्रकरण रहा हो मेडिकल साइंस में इससे बड़ी सर्जरी दुर्लभ है जो आज से वर्षों पूर्व उत्तराखंड की धरती पर मंत्र और यंत्रों की सिद्धि से हो चुकी है इसलिए यह धरती तपोभूमि है।

उन्होंने राजस्थान की धरती पर यह कहकर   उत्तराखंड राज्य का झंडा बुलंद कर दिया कि बहुत शीघ्र जुलाई माह में उत्तराखंड देश का पहला राज्य होगा जहां पर नई शिक्षा नीति पूर्ण रूप से लागू होगी और उसमें ज्योतिष और वेदों को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इसके लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और शिक्षा मंत्री डॉक्टर धन सिंह रावत निरंतर राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों से विचार विमर्श कर ऐतिहासिक कदम उठा रहे है। कहा कि उत्तराखंड की सरकार चार धाम यात्रा को पूर्ण वैदिक और आध्यात्मिकता से शिष्टाचार पूर्वक संपन्न कर रही है और वे स्वयं देश के विभिन्न प्रदेशों से यात्रा पर आए श्रद्धालुओं को धर्म एवं ज्योतिष पर निरंतर परामर्श दे रहे हैं।

आज उत्तराखंड वापस लौटने पर एयरपोर्ट पर आचार्य श्री के अनुयायियों ने उनका भव्य और दिव्य स्वागत किया । कल हंस फाउंडेशन की तरफ से डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल का उनके आवास पर भव्य स्वागत किया जाएगा और उसके बाद कई अन्य  संस्थाओं और समितियों  के उच्च पदाधिकारी  उनसे भेंट करेंगे।


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