Ad image

रवासन नदी से होकर जाने वाले 22 किलोमीटर के इस पैदल रास्ते पर वन्य जीवों से खुद को बचते-बचाते लालढाग पंहुचना चुनौतीपूर्ण या उपलब्धि से कम नहीं-डीएम आशीष चौहान

Garhninad Desk
4 Min Read
Please click to share News

खबर को सुनें

पौड़ी 08 जून, 2023 जिलाधिकारी डॉ आशीष चौहान ने विधानसभा क्षेत्र यमकेश्वर के ग्राम अमोला से लालढांग तक रवासन नदी से होते हुए 22 किमी0 की पैदल ट्रैकिंग की। क्षेत्र के पांच दर्जन से अधिक गांवों के लोग लालढांग, कोटद्वार व नजीबाबाद आने-जाने के लिए इस पैदल मार्ग का उपयोग करते आये हैं। हालांकि लालढांग-धारकोट-एडवासिला मोटर मार्ग व धारकोट-यमकेश्वर मोटर मार्ग की सुविधा होने के बाद इस पैदल मार्ग का उपयोग थोड़ा कम हो गया है।

Contents
ट्रैकिंग दल ने 22 किमी0 का पैदल सफर 05 घण्टे में पूरा कियापैदल मार्ग का इतिहास पुराना हैजंगली जीवों से स्वयं को बचाना चुनौतिग्राम प्रधान अमोला आशीष अमोली का कहना था कि यह मार्ग मुख्य रुप से साल्ट रुट के नाम से जाना जाता है। कहा कि दैनिक रुप से उपयोग में आने वाली चीजो को क्षेत्र के गांवों तक पंहुचाने के लिए इस मार्ग का व्यापक रुप से उपयोग होता आया है। रवासन नदी राजाजी नेशनल पार्क के एक छोर से होकर बहती है, इस पैदल मार्ग पर जंगली जीवों हाथी, बाघ, तेंदुआ, बार्किंगडियर, स्पॉटेड डियर, बारहसिंघा, जंगली सुअर आदि का दिखना आम बात है।इस दौरान एसडीएम यमकेश्वर आकाश जोशी, एसडीएम श्रीनगर आजयवीर सिंह, बीडीओ यमकेश्वर दृष्ठि आनन्द, एडीआईओ सूचना सुनील तोमर सहित राजाजी नेशनल पार्क के क्षेत्रीय विशेषज्ञ व वन विभाग के कार्मिक मौजूद थे।

ट्रैकिंग दल ने 22 किमी0 का पैदल सफर 05 घण्टे में पूरा किया

जिलाधिकारी ने कहा कि रवासन नदी से होकर जाने वाले 22 किलोमीटर के इस पैदल रास्ते पर वन्य जीवों से खुद को बचते-बचाते लालढाग पंहुचना चुनौतीपूर्ण है यथा किसी उपब्लिध से कम नहीं है। जिलाधिकारी सहित 26 सदस्य ट्रैकिंग दल द्वारा अमोला से लालढांग 22 किमी0 का पैदल सफर 05 घण्टे में पूरा किया गया। दल 03 बजे ट्रैकिंग प्रारम्भ करते हुए दल सायं 8 बजे लालढांग पंहुचा।

लालढांग पंहुचने पर जिलाधिकारी ने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि इस पैदल मार्ग को मुख्यतया साल्ट रुट के नाम से जाना जाता है, स्थानीय लोगो का कहना था कि वे इस रास्ते से नमक के लिए लालढांग जाते थे। जिलाधिकारी ने कहा कि बिना वन्य जीव संर्घष के रवासन नदी होते हुए लालढांग पंहुचना वन्य जीवों व मनुष्य के बीच तालमेल व क्षेत्रीय लोगो की जागरुता को दर्शाता है। उन्होने कहा कि वन्य जीव और मानुष एक ही परिवेश में रह सकते है बशर्ते एक-दूसरे से नियमित दूरी हो।

पैदल मार्ग का इतिहास पुराना है

उन्होने कहा कि क्षेत्र के पांच दर्जन से अधिक गांवों के उपयोग में आने वाले इस पैदल मार्ग का इतिहास बहुत पुराना है जिसका उपयोग क्षेत्र के लोग दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली चीजों को गांवों तक पंहुचाने के लिए किया करते हैं। उन्होने कहा कि राजाजी नेशनल पार्क के किनारें बहने वाली रवासन नदी का यह मार्ग क्षेत्र के लोगों द्वारा शर्टकट के रुप में उपयोग में लाया जाता है।

जंगली जीवों से स्वयं को बचाना चुनौति

इस पैदल र्ग पर चलते समय स्वयं को जंगली जीवों से बचाने के लिए सतर्कता अति आवश्यक है। डीएम ने कहा कि लोगो की मुश्किलों को जानने का सबसे कारगर तरीका स्वयं को उनके स्थान पर रखते हुए मुल्यांकन करने से होता है। इससे पता चलता है कि क्षेत्र के लोगों का कितना मेहनती व संर्घशील व्यक्तित्व है।

इस दौरान जिलाधिकारी ने राजाजी नेशनल पार्क में वन गुज्जरों से मुलाकात करते हुए उनकी समस्याओं को सुना तथा उनकी समस्याओं के हर सम्भाव्य समाधान का भरोसा दिया।

ग्राम प्रधान अमोला आशीष अमोली का कहना था कि यह मार्ग मुख्य रुप से साल्ट रुट के नाम से जाना जाता है। कहा कि दैनिक रुप से उपयोग में आने वाली चीजो को क्षेत्र के गांवों तक पंहुचाने के लिए इस मार्ग का व्यापक रुप से उपयोग होता आया है। रवासन नदी राजाजी नेशनल पार्क के एक छोर से होकर बहती है, इस पैदल मार्ग पर जंगली जीवों हाथी, बाघ, तेंदुआ, बार्किंगडियर, स्पॉटेड डियर, बारहसिंघा, जंगली सुअर आदि का दिखना आम बात है।
इस दौरान एसडीएम यमकेश्वर आकाश जोशी, एसडीएम श्रीनगर आजयवीर सिंह, बीडीओ यमकेश्वर दृष्ठि आनन्द, एडीआईओ सूचना सुनील तोमर सहित राजाजी नेशनल पार्क के क्षेत्रीय विशेषज्ञ व वन विभाग के कार्मिक मौजूद थे।

Please click to share News
Share This Article
error: Content is protected !!