उत्तराखंड के पांच शहरों में शहरी नदी प्रबंधन योजना के लिए ऋषिकेश में कार्यसमिति की बैठक आयोजित

ऋषिकेश, 20 मार्च 2025 । राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी), जल शक्ति मंत्रालय और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (एनआईयूए), आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त प्रयास से उत्तराखंड के पांच शहरों- गंगोत्री-यमुनोत्री, ऋषिकेश, हरिद्वार, हल्द्वानी-काठगोदाम और रामनगर में शहरी नदी प्रबंधन योजना (यूआरएमपी) विकसित करने की पहल शुरू की गई है।
इसी कड़ी में यूआरएमपी की कार्यसमिति की एक महत्वपूर्ण बैठक नगर निगम ऋषिकेश के स्वर्ण जयंती सभागार में आयोजित की गई। इस बैठक में नगर निगम ऋषिकेश के महापौर श्री शंभू पासवान ने मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया। बैठक में महापौर श्री शंभू पासवान और नगर आयुक्त श्री शैलेंद्र सिंह नेगी ने सभी प्रतिभागियों को संबोधित किया। इस दौरान नगर निगम ऋषिकेश और विभिन्न विभागों द्वारा नदी प्रबंधन से संबंधित किए जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी साझा की गई। नगर आयुक्त श्री नेगी ने सभी विभागों से एकजुट होकर यूआरएमपी को विकसित करने में संबंधित एजेंसियों को पूर्ण सहयोग देने की अपील की। साथ ही, उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन, नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम और रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के तहत पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों के बारे में भी बताया।एनएमसीजी और एनआईयूए की ओर से श्री राहुल सचदेवा, सुश्री इसलीन कौर और नामित फर्म एल एसोसिएट्स की सुश्री मुग्धा शेखर ने यूआरएमपी के मुख्य उद्देश्यों, वर्तमान स्थिति, बेसलाइन डेटा, स्वॉट विश्लेषण और अंतर क्षेत्रों के लिए प्लानिंग डिजाइन पर प्रकाश डाला। इसके अलावा, राज्य स्वच्छ गंगा मिशन, नमामि गंगे के मॉनिटरिंग विशेषज्ञ श्री रोहित जयाड़ा ने योजना की प्रगति की निगरानी से संबंधित जानकारी दी।
बैठक में अन्य विभागों ने भी अपने कार्यों का ब्योरा प्रस्तुत किया, जिसमें एसटीपी प्लांट, वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, सीवर और सेप्टिक टैंक प्रबंधन से जुड़े प्रयास शामिल थे।
बैठक में सहायक नगर आयुक्त श्री रमेश सिंह रावत, तहसीलदार श्री सुरेंद्र सिंह, यूपीसीएल के एसडीओ श्री अरविंद नेगी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पी.के. चंदोला, उप प्रभागीय वनाधिकारी श्री अनिल रावत, परियोजना प्रबंधक श्री संजीव कुमार वर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। यह बैठक उत्तराखंड में नदी प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।