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लेख:: भारतीय छात्रों के लिए बेहतरीन विकल्प बन रहा है फिलीपींस, विदेश में एमबीबीएस करना हुआ आसान – कडविन पिल्लई

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नीट यूजी 2025  के परिणाम आ चुके हैं, भारतीय छात्रों के सामने एमबीबीएस को लेकर एक मुश्किल सवाल खड़ा है – सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीमित सीटें और निजी संस्थानों की भारी-भरकम फीस। ऐसे में फिलीपींस भारतीय छात्रों के लिए एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए एक किफायती, भरोसेमंद और उभरता हुआ विकल्प बनकर सामने आया है।

हाल ही में फिलीपींस सरकार ने भारतीय नागरिकों को 14 दिन की वीज़ा-फ्री यात्रा की सुविधा दी है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना है, लेकिन इससे उन छात्रों और परिवारों को भी लाभ होगा जो मेडिकल पढ़ाई के लिए फिलीपींस पर विचार कर रहे हैं। अब छात्र और अभिभावक बिना लंबी वीज़ा प्रक्रिया के कॉलेजों का दौरा कर सकते हैं, शिक्षकों से मिल सकते हैं, वहां की पढ़ाई और सुविधाओं को नज़दीक से समझ सकते हैं।

कडविन पिल्लई, ट्रांसवर्ल्ड एजुकेयर के मैनेजिंग डायरेक्टर और किंग्स इंटरनेशनल मेडिकल एकेडमी के डायरेक्टर का कहना है, “जहां आप पढ़ाई करने वाले हैं, वहां जाकर खुद देखना और उस माहौल को महसूस करना फैसले को आसान बना देता है। फिलीपींस छात्रों को खुले मन से आमंत्रित कर रहा है और उन्हें आत्मविश्वास के साथ निर्णय लेने का अवसर भी दे रहा है।”

फिलीपींस भारतीय छात्रों के बीच कई कारणों से तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। सबसे अहम बात यह है कि वहां पढ़ाई का माध्यम पूरी तरह अंग्रेज़ी है, जिससे भाषा की कोई बाधा नहीं आती। इसके अलावा वहां का मेडिकल कोर्स अमेरिकी शिक्षा प्रणाली पर आधारित है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर का शैक्षणिक अनुभव और करियर में वैश्विक अवसर प्रदान करता है।

एमबीबीएस कोर्स के दौरान मिलने वाला क्लिनिकल प्रशिक्षण फिलीपींस की एक बड़ी खासियत है। देश की उष्णकटिबंधीय जलवायु और बीमारियों का स्वरूप भारत से काफी हद तक मेल खाता है। इससे भारतीय छात्रों को वहां पढ़ाई के दौरान ऐसे मेडिकल केस देखने और समझने का मौका मिलता है, जिनका सामना वे भविष्य में भारत में प्रैक्टिस के दौरान कर सकते हैं। यह उन्हें व्यावहारिक और प्रासंगिक अनुभव प्रदान करता है।

पढ़ाई का खर्च भी एक अहम वजह है। फिलीपींस में एमबीबीएस की कुल लागत भारत के निजी मेडिकल कॉलेजों और अमेरिका, ब्रिटेन या ऑस्ट्रेलिया जैसे अंतरराष्ट्रीय विकल्पों की तुलना में काफी कम है। ट्यूशन फीस, रहने और अन्य खर्च कम होने की वजह से यह भारतीय छात्रों के लिए एक किफायती विकल्प बन जाता है।

फिलीपींस सरकार ने मेडिकल शिक्षा को सुधारने के लिए कई प्रगतिशील कदम उठाए हैं। हालिया अपडेट के तहत, सीएचईडी (कमीशन ऑन हायर एजुकेशन) से मान्यता प्राप्त कॉलेजों से पढ़ाई पूरी करने वाले विदेशी छात्र अब इंटर्नशिप के बाद फिलीपींस में रजिस्टर होकर प्रैक्टिस कर सकते हैं। ये बदलाव फिलीपींस की मेडिकल शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लाने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं।

यह विकास भारतीय छात्रों के लिए खास महत्व रखता है क्योंकि यह नीति भारतीय मेडिकल कमीशन की रूपरेखा से मेल खाती है। यानी छात्र चाहें तो फिलीपींस में मेडिकल करियर शुरू कर सकते हैं, या भारत लौटकर फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एक्‍जामिनेशन (FMGE) या नेक्‍स्‍ट जैसी परीक्षाओं के जरिए यहां प्रैक्टिस कर सकते हैं।

वीज़ा छूट का फैसला बेहद समय पर आया है। हर साल 20 लाख से अधिक छात्र नीट यूजी की परीक्षा देते हैं, जबकि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सिर्फ एक लाख सीटें होती हैं। ऐसे में विदेश में पढ़ाई की संभावना तलाशने वालों के लिए अब फिलीपींस को करीब से देखने, समझने और निर्णय लेने का मौका है।  

फिलीपींस के कई सीएचईडी मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेज भारतीय छात्रों को सक्रिय रूप से दाखिला दे रहे हैं। बढ़ती मांग को देखते हुए, कई संस्थानों ने भारतीय भोजन, शैक्षणिक परामर्श और लाइसेंसिंग परीक्षाओं की तैयारी जैसी सेवाएं भी शुरू की हैं, जिससे छात्रों को नई जगह में सामंजस्य बैठाने में आसानी हो रही है।

जैसे-जैसे छात्रों की रुचि बढ़ रही है, फिलीपींस अपनी बेहतर नीतियों, आसान पहुंच, खुली संस्कृति और भारत के साथ मजबूत रिश्तों के कारण एशिया में मेडिकल शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। इन संबंधों से छात्रों और संस्थानों के बीच सीमा पार सहयोग को भी बढ़ावा मिल रहा है।

नीट यूजी 2025 के बाद भारतीय छात्र जब अपने भविष्य की दिशा तय कर रहे हैं, तब फिलीपींस गुणवत्ता, किफायत, और बेहतर नीतियों के साथ विदेश में मेडिकल शिक्षा का एक ठोस और भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है।


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