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संपादकीय: देर से जागी सरकार या चुनावी मजबूरी?

Govind Pundir
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टिहरी गढ़वाल। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा किया गया हालिया मंत्रिमंडल विस्तार कई सवाल खड़े करता है। नवरात्रि जैसे शुभ अवसर पर पांच नए मंत्रियों को शपथ दिलाना निश्चित रूप से एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश है, लेकिन इसके समय और मंशा पर गंभीर चर्चा जरूरी है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह फैसला अब क्यों? पिछले चार वर्षों में सरकार ने कई अहम मौके देखे, लेकिन मंत्रिमंडल के खाली पदों को भरने की जरूरत तब महसूस नहीं हुई। यदि यही विस्तार पहले कर दिया जाता, तो संभवतः शासन-प्रशासन में बेहतर समन्वय और विकास कार्यों में तेजी देखने को मिलती। अब, जब 2027 के विधानसभा चुनाव में मुश्किल से एक वर्ष का समय बचा है, यह कदम स्वाभाविक रूप से चुनावी रणनीति का हिस्सा अधिक प्रतीत होता है।

नए मंत्रियों के चयन में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने की कोशिश साफ नजर आती है। हरिद्वार, देहरादून, गढ़वाल और कुमाऊं—सभी क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया है। लेकिन यह भी सच है कि विकास का पैमाना केवल प्रतिनिधित्व नहीं, बल्कि परिणाम होता है। जनता यह जानना चाहती है कि इन नए चेहरों के पास इतने कम समय में क्या ठोस उपलब्धि देने की योजना है।
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यह विस्तार भाजपा के संगठनात्मक समीकरण को मजबूत करने का प्रयास जरूर है, लेकिन शासन की दृष्टि से यह देर से उठाया गया कदम लगता है। चार साल तक जिन पदों को खाली रखा गया, वे अब अचानक इतने महत्वपूर्ण कैसे हो गए? यह प्रश्न विपक्ष ही नहीं, आम जनता के मन में भी है।
यह भी ध्यान रखना होगा कि केवल मंत्रिमंडल विस्तार से सरकार की छवि नहीं बदलती। जनता अब घोषणाओं से आगे बढ़कर परिणाम देखना चाहती है। एक साल का समय किसी भी मंत्री के लिए नीतियों को जमीन पर उतारने के लिहाज से बेहद सीमित होता है। ऐसे में बड़े बदलाव की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं लगता।

निष्कर्षतः, यह मंत्रिमंडल विस्तार जितना प्रशासनिक फैसला है, उससे कहीं अधिक राजनीतिक संदेश है। इसे “मास्टरस्ट्रोक” कहा जाए या “चुनावी तैयारी”, यह तो आने वाला समय बताएगा, लेकिन फिलहाल यह कदम सरकार की देरी से जागी सक्रियता का संकेत जरूर देता है। जनता के लिए असली कसौटी अब भी वही है—विकास, पारदर्शिता और ठोस परिणाम।

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*** संक्षिप्त परिचय / बायोडाटा *** नाम: गोविन्द सिंह पुण्डीर संपादक: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल टिहरी। उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार। पत्रकारिता अनुभव: सन 1978 से सतत सक्रिय पत्रकारिता। विशेषता: जनसमस्याओं, सामाजिक सरोकारों, संस्कृति एवं विकास संबंधी मुद्दों पर गहन लेखन और रिपोर्टिंग। योगदान: चार दशकों से अधिक समय से प्रिंट व सोशल मीडिया में निरंतर लेखन एवं संपादन वर्तमान कार्य: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को नई दिशा प्रदान करना।
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