चैत्र नवरात्रि: ज्वालामुखी सिद्धपीठ देवढुंग में 10 दिवसीय भव्य अनुष्ठान आज से

देवी भागवत और श्रीमद् भागवत कथा का होगा आयोजन, हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना
(घनसाली से लोकेंद्र जोशी)
टिहरी गढ़वाल। चैत्र नवरात्रि के शुभ अवसर पर टिहरी गढ़वाल के घनसाली क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक सिद्धपीठ ज्वालामुखी मंदिर देवढुंग में 10 दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान 19 मार्च से शुरू हो गया है जो 28 मार्च तक चलेगा, जिसमें प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
देवढुंग स्थित ज्वालामुखी मंदिर क्षेत्र का प्रमुख आस्था केंद्र है, जो पट्टी बासर और थाती कठूड के मध्य बिनकखाल के समीप एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। यहां से धर्मगंगा और बालगंगा नदियों के संगम स्थल के साथ-साथ प्रसिद्ध भगवान बूढ़ा केदार धाम के भी दर्शन होते हैं, जो पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पांडवों से जुड़ा हुआ है।
मंदिर परिसर से आसपास के 50 से अधिक गांवों का विहंगम दृश्य दिखाई देता है, जिससे यह स्थल धार्मिक के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य का भी अद्भुत संगम बन जाता है। श्रद्धालु यहां मां ज्वालामुखी के साथ-साथ बूढ़ा केदार और बेलेश्वर धाम के दर्शन कर पुण्य अर्जित करते हैं।
इस वर्ष के अनुष्ठान में दो प्रमुख धार्मिक कथाओं का आयोजन किया जा रहा है। श्रीमद् देवी भागवत महापुराण का वाचन आचार्य संदीप शास्त्री द्वारा तथा श्रीमद् भागवत कथा का वाचन वृंदावन धाम से पधारे बाल व्यास माधव कृष्ण रतूड़ी द्वारा किया जाएगा।
यात्रा सुविधा की दृष्टि से श्रद्धालु ऋषिकेश-चंबा-घनसाली-चमियाला मार्ग से बिनकखाल तक बस एवं टैक्सी सेवाओं के माध्यम से आसानी से पहुंच सकते हैं। मंदिर तक सड़क से लगभग 300 मीटर की दूरी पैदल तय करनी होती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार यह क्षेत्र चारधाम यात्रा के प्राचीन पैदल मार्ग का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा है। यहां से होकर श्रद्धालु त्रियुगी नारायण होते हुए केदारनाथ धाम तक पहुंचते थे। वर्तमान में इस मार्ग को मोटर मार्ग से जोड़ने की मांग लंबे समय से की जा रही है, जिससे गंगोत्री से केदारनाथ की दूरी भी कम हो सकेगी और क्षेत्र में पर्यटन व रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
मंदिर समिति ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस पावन अवसर पर ज्वालामुखी धाम पहुंचकर धार्मिक अनुष्ठान में भाग लें और माता का आशीर्वाद प्राप्त करें।



