यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा दो नई कोलैटरल फ्री निर्यात ऋण योजना का शुभारंभ

Govind Pundir
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देहरादून 16 फरवरी, 2026। निर्यात को बढ़ावा देने और भारत सरकार के विज़न के अनुरूप 2047 तक भारत को विकसित भारत बनाने के लिए, यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा दो नई निर्यात ऋण कार्यशील पूंजी योजनाओं का शुभारंभ किया गया है- “यूनियन निर्यात सुगम” और “यूनियन निर्यात प्रोत्साहन योजना”।

“यूनियन निर्यात सुगम” योजना के अंतर्गत सभी विनिर्माता निर्यातकर्ताओं को 80 करोड़ रुपये तक का निर्यात ऋण कार्यशील पूंजी प्रदान की जाती है, जिसमें गैर-एमएसएमई भी शामिल हैं (व्यापारी, मर्चेंट निर्यातकर्ता, रत्न, आभूषण तथा हीरे और लौह अयस्क निर्यातकर्ताओं को छोड़कर). इस योजना के अंतर्गत, कोलैटरल सुरक्षा जमा करना आवश्यक नहीं है. यह योजना विशेषकर निर्यातकर्ताओं को किफ़ायती निर्यात वित्त का एक्सेस प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई है, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में बेहतर प्रतिस्पर्धा कर सकें।

“यूनियन निर्यात प्रोत्साहन योजना” के अंतर्गत सभी सूक्ष्म और लघु निर्यातकर्ताओं (व्यापारी, मर्चेंट निर्यातकर्ता, रत्न, आभूषण तथा हीरे और लौह अयस्क निर्यातकर्ताओं सहित) को 10 करोड़ रुपये तक की कोलैटरल फ्री निर्यात ऋण कार्यशील पूंजी दी जाती है. इस योजना के अंतर्गत, कोलैटरल सुरक्षा या तृतीय पक्ष गारंटी की कोई आवश्यकता नहीं है. यह योजना सूक्ष्म और लघु निर्यातकर्ताओं के लिए बनाई गई है, जिसके माध्यम से किफ़ायती और बिना किसी गारंटी के निर्यात वित्त दिया जाता है।

दोनों योजनाओं के अंतर्गत, रुपये और विदेशी मुद्रा में प्रतिस्पर्धात्मक ब्याज दर दिए जाते हैं, जो बाहरी बेंचमार्क से जुड़े होते हैं और सीधा डीलिंग एक्सेस के साथ बेहतर एक्सचेंज मार्जिन देते हैं।

यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया सदैव विनिर्माता निर्यातकर्ताओं और एमएसएमई को सपोर्ट करने में सबसे आगे रहा है, जिसमें कार्यशील पूंजी के दबाव को कम किया गया है और निर्यातकर्ताओं और एमएसएमई को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कई तरह की ऋण सुविधाएं दी गई हैं।

यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों में निर्यात ऋण में लगभग 10% मार्केट शेयर के साथ दूसरे स्थान पर है।

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*** संक्षिप्त परिचय / बायोडाटा *** नाम: गोविन्द सिंह पुण्डीर संपादक: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल टिहरी। उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार। पत्रकारिता अनुभव: सन 1978 से सतत सक्रिय पत्रकारिता। विशेषता: जनसमस्याओं, सामाजिक सरोकारों, संस्कृति एवं विकास संबंधी मुद्दों पर गहन लेखन और रिपोर्टिंग। योगदान: चार दशकों से अधिक समय से प्रिंट व सोशल मीडिया में निरंतर लेखन एवं संपादन वर्तमान कार्य: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को नई दिशा प्रदान करना।
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