देहरादून। देहरादून में नाबार्ड और NABCONS की पहल पर उत्तराखंड के सॉंग नदी बेसिन में कार्बन क्रेडिट की संभावनाओं को लेकर व्यापक अध्ययन शुरू किया गया है।
सचिव जलागम ने देहरादून और टिहरी जिलों में कार्बन क्रेडिट के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने और इसके विपणन पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए। इसके तहत टिहरी के रिंगलगढ़ क्षेत्र में टीम ने पिरुल से बायोचार उत्पादन और कार्बन संचयन की संभावनाओं का क्षेत्र भ्रमण कर ग्रामीणों से संवाद किया।
अध्ययन में एग्रोफॉरेस्ट्री, मृदा कार्बन (SOC) सुधार, बायोचार तथा पिरुल आधारित ब्रिकेट्स जैसे उपायों पर फोकस किया गया है। इन गतिविधियों से कार्बन अवशोषण बढ़ाकर कार्बन क्रेडिट तैयार किए जा सकेंगे, जिन्हें बाजार में बेचकर किसानों को अतिरिक्त आय मिल सकती है। साथ ही मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, जंगलों में आग की घटनाएं कम होंगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बनेंगे।
यह पहल किसानों की आय वृद्धि के साथ पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।




