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शिक्षा विभाग, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में ‘उल्लास’ पर राष्ट्रीय पैनल चर्चा आयोजित

Govind Pundir
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श्रीनगर (गढ़वाल), 10 जुलाई 2026 । शिक्षा विभाग हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय (केंद्रीय विश्वविद्यालय), श्रीनगर गढ़वाल में राष्ट्रीय साक्षरता केंद्र प्रकोष्ठ (CNCL), एनसीईआरटी के सहयोग से ‘उल्लास (ULLAS) के लिए उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका’ विषय पर राष्ट्रीय पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा मंत्रालय, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE), राष्ट्रीय साक्षरता केंद्र प्रकोष्ठ (CNCL) तथा विश्वविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षाविदों ने सहभागिता करते हुए आजीवन शिक्षा, पूर्ण साक्षरता तथा शिक्षक शिक्षा की भूमिका पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। 

कार्यक्रम का शुभारंभ स्कूल ऑफ एजुकेशन की विभागाध्यक्ष एवं अधिष्ठाता प्रो. सुनीता गोदियाल के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि “सीखना एक आजीवन प्रक्रिया है और ‘उल्लास’ अभियान समाज में सतत अधिगम की संस्कृति को विकसित करने का प्रभावी माध्यम है।” उन्होंने यह भी बताया कि बी.एड. पाठ्यक्रम में ‘उल्लास’ कार्यक्रम को शामिल किया जा चुका है, जिससे भावी शिक्षक समाज में साक्षरता अभियान को और प्रभावी बना सकेंगे। 

कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए आईक्यूएसी की उपनिदेशक प्रो. सीमा धवन ने कहा कि “पूर्ण साक्षरता केवल पढ़ना-लिखना नहीं, बल्कि समाज को आजीवन सीखने की दिशा में आगे बढ़ाने का अभियान है। ‘उल्लास’ कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को दो क्रेडिट प्रदान किए जाएंगे, जिससे वे सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ साक्षरता अभियान में सक्रिय भागीदारी निभा सकेंगे।” 

अपने उद्घाटन उद्बोधन में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्री प्रकाश सिंह ने उत्तराखंड के 100 प्रतिशत साक्षरता लक्ष्य प्राप्त करने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, “साक्षरता प्राप्त करना उपलब्धि है, लेकिन उसे बनाए रखना उससे भी बड़ी जिम्मेदारी है। ‘उल्लास’ समाज में उत्साह, सहयोग और सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है। शिक्षक केवल पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि समाज का सृजक है। यदि प्रत्येक शिक्षक और विद्यार्थी एक व्यक्ति को साक्षर बनाने का संकल्प लें तो विकसित भारत-2047 का सपना अवश्य साकार होगा।” उन्होंने विद्यार्थियों को समाज से जुड़कर साक्षरता अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। 

राष्ट्रीय साक्षरता केंद्र प्रकोष्ठ (CNCL) की प्रभारी प्रो. ऊषा शर्मा ने कहा, “शिक्षा एक सतत प्रक्रिया है। उत्तराखंड ने 100 प्रतिशत साक्षरता प्राप्त कर ली है, अब चुनौती पोस्ट-लिटरेसी को मजबूत करने की है। डिजिटल, वित्तीय, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता तथा पेरेंटिंग जैसी जीवनोपयोगी साक्षरताओं को समाज तक पहुँचाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। हमें केवल ज्ञान नहीं देना, बल्कि सीखने की कला भी सिखानी होगी।” 

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ा ने कहा, “देश में छात्र-शिक्षक अनुपात और छात्राओं के नामांकन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। साक्षरता की परिभाषा अब केवल पढ़ना-लिखना नहीं रही, बल्कि इसमें डिजिटल, वित्तीय और कानूनी साक्षरता भी शामिल है। शिक्षक शिक्षा संस्थानों और उनके विद्यार्थियों को इस राष्ट्रीय मिशन से जोड़ना समय की आवश्यकता है।” 

शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव श्रीमती अर्चना शर्मा अवस्थी ने कहा, “स्वतंत्रता के समय देश की साक्षरता दर मात्र 12 प्रतिशत थी, जो आज 81 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। यदि प्रत्येक शिक्षित नागरिक एक व्यक्ति को साक्षर बनाने का संकल्प ले, तो भारत पूर्ण साक्षरता की दिशा में और तेजी से आगे बढ़ेगा। पोस्ट-लिटरेसी गतिविधियों के माध्यम से नव-साक्षरों को आगे की शिक्षा से जोड़ना आवश्यक है।” 

इसके उपरांत आयोजित पैनल चर्चा में प्रो. ऊषा शर्मा, प्रो. सुनीता गोदियाल, प्रो. सीमा धवन एवं डॉ. ऋषभ कुमार मिश्रा ने प्रतिभागियों के प्रश्नों का उत्तर दिया।

प्रो. ऊषा शर्मा ने निजी शिक्षक शिक्षा संस्थानों के लिए राज्य स्तर पर मास्टर ट्रेनर तैयार करने तथा प्रत्येक संस्थान में ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने ‘उल्लास’ पोर्टल पर उपलब्ध ऑडियो-वीडियो संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर बल दिया। 

शोधार्थियों की भूमिका पर डॉ. ऋषभ कुमार मिश्रा ने कहा, “शोधार्थी हमारी सबसे बड़ी संपत्ति हैं। वे साक्ष्य आधारित दस्तावेजीकरण एवं शोध के माध्यम से ‘उल्लास’ अभियान को एक सतत एवं टिकाऊ मॉडल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।” 

प्रो. सीमा धवन ने कहा कि “कार्यक्रम की गुणवत्ता बनाए रखने, निगरानी तथा पोस्ट-लिटरेसी गतिविधियों के प्रभावी संचालन में शोधार्थियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।” 

कार्यक्रम के अंत में बिड़ला परिसर के प्रभारी एवं विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल नौटियाल ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। 

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, शोधार्थी, विद्यार्थी तथा विभिन्न उच्च शिक्षा संस्थानों के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।


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*** संक्षिप्त परिचय / बायोडाटा *** नाम: गोविन्द सिंह पुण्डीर संपादक: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल टिहरी। उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार। पत्रकारिता अनुभव: सन 1978 से सतत सक्रिय पत्रकारिता। विशेषता: जनसमस्याओं, सामाजिक सरोकारों, संस्कृति एवं विकास संबंधी मुद्दों पर गहन लेखन और रिपोर्टिंग। योगदान: चार दशकों से अधिक समय से प्रिंट व सोशल मीडिया में निरंतर लेखन एवं संपादन वर्तमान कार्य: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को नई दिशा प्रदान करना।
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