वैज्ञानिक क्षमता, तकनीकी दक्षता और सांस्कृतिक आत्मविश्वास के समन्वय से बनेगा विकसित भारत: प्रो. दत्ता

Govind Pundir
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नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से विकसित भारत-2047 का लक्ष्य हासिल करने पर पैनल परिचर्चा

टिहरी गढ़वाल 25 अगस्त । मानव पूंजी के समुचित उपयोग, वैज्ञानिक एवं तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास तथा सांस्कृतिक आत्मविश्वास को साथ लेकर चलने से ही विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। नई शिक्षा नीति-2020 इन सभी आयामों को एकीकृत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यह बात डीबीएस पीजी कॉलेज देहरादून की अर्थशास्त्र की प्रोफेसर राजलक्ष्मी दत्ता ने कही।
राजकीय महाविद्यालय नरेंद्रनगर में अखिल भारतीय शिक्षा समागम के तहत राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के छह वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित एक माह तक चलने वाली विभिन्न गतिविधियों की श्रृंखला में हाइब्रिड मोड पर पैनल परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा का विषय विकसित भारत के निर्माण में नई शिक्षा नीति की भूमिका रहा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।
मुख्य पैनलिस्ट प्रो. राजलक्ष्मी दत्ता ने कहा कि मानव पूंजी का लाभांश प्राप्त करने के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तकनीकी दक्षता और सांस्कृतिक चेतना का विकास जरूरी है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के माध्यम से शिक्षा को रोजगारपरक, कौशल आधारित और बहुविषयक बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जो विकसित भारत के लक्ष्य की मजबूत आधारशिला साबित हो सकता है।
पैनलिस्ट डॉ. संजय महर ने नई शिक्षा नीति के तहत बहुविषयक अध्ययन, कौशल विकास और एबीसी आईडी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों को अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों और रोजगार के अवसरों को बेहतर ढंग से समझने तथा तलाशने में मदद मिलेगी। उन्होंने इसे विकसित भारत के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।
डॉ. हरिश्चंद्र रतूड़ी ने भारतीय शिक्षा नीति के ऐतिहासिक विकास और नई शिक्षा नीति के विभिन्न लाभों पर विस्तार से चर्चा की। वहीं डॉ. सोनी तिलारा ने विद्यार्थियों के प्रश्नों का समाधान करते हुए नई शिक्षा नीति के प्रमुख प्रावधानों और इसके विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी दी।
पैनलिस्ट डॉ. विक्रम सिंह बर्त्वाल ने कहा कि बहुविषयक शिक्षा एवं अनुसंधान विश्वविद्यालय (MERU) के अंतर्गत चयनित देश के 35 राज्य विश्वविद्यालय विकसित भारत के लिए मेरुदंड की भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए विश्वविद्यालयों में संरचनागत विकास के साथ-साथ सामाजिक एवं भौगोलिक परिस्थितियों का वैज्ञानिक अध्ययन और प्राप्त प्रतिपुष्टि के आधार पर प्रभावी कार्ययोजना तैयार करना आवश्यक है।
इस अवसर पर एनएसएस इकाई के विद्यार्थियों ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से विकसित भारत विषयक प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने विकसित भारत के विभिन्न आयामों, शिक्षा, तकनीक, कौशल एवं सामाजिक विकास से जुड़े विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम के सफल आयोजन पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. विजय सिंह नेगी ने पैनल परिचर्चा की संयोजक डॉ. भारती जायसवाल, पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन प्रतियोगिता के संयोजक मंडल की सदस्य डॉ. ज्योति शैली एवं डॉ. विजय प्रकाश भट्ट सहित समस्त महाविद्यालय स्टाफ को बधाई दी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. जितेंद्र नौटियाल ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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*** संक्षिप्त परिचय / बायोडाटा *** नाम: गोविन्द सिंह पुण्डीर संपादक: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल टिहरी। उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार। पत्रकारिता अनुभव: सन 1978 से सतत सक्रिय पत्रकारिता। विशेषता: जनसमस्याओं, सामाजिक सरोकारों, संस्कृति एवं विकास संबंधी मुद्दों पर गहन लेखन और रिपोर्टिंग। योगदान: चार दशकों से अधिक समय से प्रिंट व सोशल मीडिया में निरंतर लेखन एवं संपादन वर्तमान कार्य: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को नई दिशा प्रदान करना।
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