रायवाला 8 अगस्त । सावन शिवरात्रि के अवसर पर नृसिंह भक्ति सेवा संस्थान एवं सोमेश्वर कीर्तन मण्डली के सौजन्य से कौटिल्य वाटिका वेडिंग प्वाइंट, प्रतीतनगर रायवाला में आयोजित श्रीशिवमहापुराण कथा के दौरान नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज, अध्यक्ष सनातन धर्म विकास परिषद (उत्तर प्रदेश), ने श्रद्धालुओं को भगवान शिव की उपासना का आध्यात्मिक महत्व बताते हुए कहा कि शिवलिंग पर श्रद्धा एवं विधि-विधान से बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करने से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं तथा साधक के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि शास्त्रों के अनुसार त्रिदलयुक्त बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। बेलपत्र के तीन दल ब्रह्मा, विष्णु और महेश तथा सत्त्व, रज और तम गुणों का प्रतीक माने गए हैं। श्रद्धापूर्वक बेलपत्र अर्पित करने से पापों का क्षय होता है और शिवकृपा प्राप्त होती है।
उन्होंने बताया कि धतूरा भगवान शिव के वैराग्य और विषपान की स्मृति का प्रतीक है। समुद्र मंथन के समय हलाहल विष का पान कर सृष्टि की रक्षा करने वाले भगवान शिव को धतूरा अर्पित करना त्याग, तपस्या और लोककल्याण की भावना का प्रतीक माना गया है।
स्वामी जी ने कहा कि भांग अर्पित करने का आध्यात्मिक अर्थ इंद्रियों पर संयम, मन की चंचलता का नियंत्रण तथा भगवान शिव के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक परंपरा में भांग अर्पित करने का उद्देश्य केवल पूजा-विधि है, इसका नशे के रूप में सेवन करना धर्म का उद्देश्य नहीं है।
कथा के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि भगवान शिव की आराधना केवल पूजन सामग्री अर्पित करने तक सीमित न रहे, बल्कि सत्य, संयम, सेवा, करुणा और सदाचार को जीवन में अपनाकर ही वास्तविक शिवभक्ति का फल प्राप्त किया जा सकता है।
आज इस अवसर पर साध्वी मां देवेश्वरी जी, वेदाचार्य सुमन देव कुकरेती, बसन्ती मां के पुजारी आचार्य विनय पोखरियाल, श्री चेतन प्रजापति, श्रीमती बीना विष्ट, श्रीमती अनीता रावत, श्रीमती कमलेश झा, राजेन्द्र कुकरेती, अनिल पंत, करन नेगी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भगवान भोलेनाथ के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।





