श्री देव सुमन विवि में वित्तीय एवं प्रशासनिक कार्यशाला आयोजित, पारदर्शिता और समयबद्धता पर दिया जोर
ऋषिकेश, 4 अगस्त 2026। श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय के पंडित ललित मोहन शर्मा परिसर, ऋषिकेश में वित्तीय एवं प्रशासनिक कार्यों को अधिक पारदर्शी, सरल, जवाबदेह और समयबद्ध बनाने को लेकर निदेशक परिसर, संकायाध्यक्षों एवं विभागाध्यक्षों की महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अम्बरीश कुमार महाजन ने की।
कार्यशाला में कुलपति ने स्पष्ट निर्देश दिए कि विश्वविद्यालय में सभी प्रकार के भुगतान अधिकतम 10 दिनों की निर्धारित अवधि के भीतर हर हाल में सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने कहा कि किसी कर्मचारी, आपूर्तिकर्ता अथवा संबंधित पक्ष का भुगतान अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रहना चाहिए। इसके लिए संबंधित विभागों और अनुभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने तथा आवश्यक दस्तावेज पूर्ण, सटीक एवं त्रुटिरहित रूप से समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
कुलपति प्रो. अम्बरीश कुमार महाजन ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान केवल उसकी शैक्षणिक उपलब्धियों से नहीं होती, बल्कि उसकी पारदर्शी, जवाबदेह और दक्ष प्रशासनिक व्यवस्था भी उसकी कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि वित्तीय प्रक्रियाएं पूरी तरह नियमसम्मत और पारदर्शी होने के साथ-साथ निर्धारित समय-सीमा में पूरी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि संबंधित विभागों की ओर से आवश्यक अभिलेख और दस्तावेज समय पर उपलब्ध करा दिए जाएं तो भुगतान प्रक्रिया में होने वाली अनावश्यक देरी को काफी हद तक समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से कहा कि विश्वविद्यालय की कार्यसंस्कृति पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध सेवा पर आधारित होनी चाहिए।
कुलपति ने विश्वविद्यालय में आधुनिक एवं डिजिटल प्रशासनिक व्यवस्था को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि वित्तीय प्रक्रियाओं के सरलीकरण, अभिलेखों के सुव्यवस्थित रखरखाव और विभिन्न कार्यालयों के बीच प्रभावी समन्वय को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों के अधिकतम उपयोग से वित्तीय एवं प्रशासनिक कार्यों में गति और पारदर्शिता दोनों बढ़ाई जा सकती हैं।
वरिष्ठ वित्त अधिकारी मनोज कुमार पाण्डेय ने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य प्रत्येक भुगतान को 10 दिनों के भीतर जारी करना है। इसके लिए सभी प्राध्यापकों एवं विभागों को निर्धारित प्रारूप में आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराने होंगे। उन्होंने बताया कि भुगतान से जुड़े प्रत्येक स्तर की नियमित समीक्षा की जाएगी और ऐसी व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे कोई भी फाइल अनावश्यक रूप से किसी कार्यालय में लंबित न रहे।
कार्यशाला में भुगतान प्रक्रिया, दस्तावेजों के सत्यापन, क्लेम प्रस्तुत करने की प्रणाली, अभिलेखों के रखरखाव तथा वित्तीय कार्यों में सूचना प्रौद्योगिकी के अधिकतम उपयोग सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने वित्तीय एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अपने सुझाव भी प्रस्तुत किए, जिन पर सकारात्मक विचार-विमर्श किया गया।
कार्यशाला के समापन पर कुलपति प्रो. अम्बरीश कुमार महाजन ने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय के सभी अधिकारी, संकायाध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना से कार्य करते हुए श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय को सुशासन, पारदर्शिता, समयबद्ध सेवा एवं उत्कृष्ट प्रशासन का आदर्श संस्थान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव दिनेश चंद्रा, वरिष्ठ वित्त अधिकारी मनोज कुमार पाण्डेय, परिसर निदेशक प्रो. एम.एस. रावत, डीन कला संकाय प्रो. पी.के. सिंह, डीन छात्र कल्याण प्रो. हेमलता मिश्रा, आईक्यूएसी निदेशक प्रो. जी.के. ढींगरा, प्रो. धर्मेंद्र तिवारी, प्रो. संगीता मिश्रा, प्रो. अंजनी दुबे, डॉ. गौरव वर्ष्णेय, डॉ. शिखा मंगाई, डॉ. नीता पांडे, डॉ. दीपा शर्मा, प्रो. बी.डी. पांडे सहित विश्वविद्यालय परिसर ऋषिकेश के समस्त विभागाध्यक्ष एवं संबंधित कर्मचारी उपस्थित रहे।





