एम्स ऋषिकेश में विश्व ट्रॉमा सप्ताह के अंतर्गत ‘नर्स इन ACT’ प्रशिक्षण एवं वैस्कुलर वर्कशॉप का आयोजन

Govind Pundir
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ATLS प्रशिक्षण कार्यक्रम की सफलता के बाद ट्रॉमा केयर को सुदृढ़ करने की दिशा में एक और पहल; दून मेडिकल कॉलेज के 70 अंतिम वर्ष के नर्सिंग विद्यार्थियों को दिया गया प्रशिक्षण

ऋषिकेश, 15 अक्टूबर 2026। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), ऋषिकेश के ट्रॉमा सेंटर में विश्व ट्रॉमा सप्ताह 2026 के अंतर्गत गुरुवार को ‘नर्स इन ACT’ प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं वैस्कुलर वर्कशॉप का आयोजन किया गया। इससे पूर्व संस्थान में ATLS (Advanced Trauma Life Support) प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया था। इसी क्रम में स्वास्थ्य सेवाओं में ट्रॉमा प्रबंधन, आपातकालीन देखभाल और व्यावहारिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इन दोनों कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का उद्घाटन एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. मीनू सिंह ने किया। इस अवसर पर डीन एकेडमिक्स डॉ. सौरभ वार्ष्णेय, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डॉ. पुनीत धमीजा, ट्रॉमा सेंटर के विभागाध्यक्ष एवं विश्व ट्रॉमा सप्ताह आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो. डॉ. क़मर आज़म, आयोजन सचिव डॉ. मधुर उनियाल, सह-आयोजन सचिव डॉ. रूबी कटारिया, डॉ. नीरज कुमार तथा मुख्य नर्सिंग अधिकारी डॉ. अनीता रानी कंसल सहित अन्य चिकित्सक, विशेषज्ञ, नर्सिंग संकाय और प्रशिक्षण टीम के सदस्य उपस्थित रहे।

‘नर्स इन ACT’ के माध्यम से 70 नर्सिंग विद्यार्थियों को प्रशिक्षण

‘नर्स इन ACT’ प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत दून मेडिकल कॉलेज के अंतिम वर्ष के 70 नर्सिंग विद्यार्थियों को ट्रॉमा एवं आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों की देखभाल से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को गंभीर रूप से घायल मरीजों की प्रारंभिक देखभाल, आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया, मरीज की सुरक्षा तथा चिकित्सा टीम के साथ प्रभावी समन्वय के महत्व से परिचित कराना था।

प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को ट्रॉमा केयर में नर्सिंग की महत्वपूर्ण भूमिका तथा आपातकालीन परिस्थितियों में व्यवस्थित एवं समयबद्ध देखभाल के बारे में जानकारी दी गई। इस पहल से भविष्य के नर्सिंग पेशेवरों को व्यावहारिक ज्ञान और आवश्यक कौशल प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किया गया।

कार्यक्रम में दून मेडिकल कॉलेज के नर्सिंग संकाय से श्री दीपक बर्थवाल तथा प्रशिक्षण टीम के सदस्यों सुश्री वंदना, श्री प्रकाश चंद्र मीणा, सुश्री दीपिका कंडपाल, सुश्री सुशीला पन्नू, सुश्री पूजा ठाकुर, सुश्री प्रियंका, सुश्री यूनिस, श्री वनेपाल सिंह, श्री ताराचंद वर्मा एवं श्री कादिर खान सहित अन्य प्रशिक्षकों ने योगदान दिया।

वैस्कुलर वर्कशॉप में रक्त वाहिकाओं की चोटों के प्रबंधन पर जोर

विश्व ट्रॉमा सप्ताह के अंतर्गत आयोजित वैस्कुलर वर्कशॉप में ट्रॉमा मरीजों में रक्त वाहिकाओं से संबंधित चोटों की पहचान, उनके प्रबंधन तथा गंभीर परिस्थितियों में विभिन्न विशेषज्ञताओं के बीच समन्वय के महत्व पर ध्यान केंद्रित किया गया। कार्यशाला के आयोजन में एनाटॉमी विभाग एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग का सहयोग रहा। इसमें डॉ. मृणाल एवं डॉ. अक्षय कपूर सहित संबंधित विशेषज्ञों ने सहभागिता की।

इस कार्यशाला का उद्देश्य ट्रॉमा मरीजों के उपचार में बहुविषयक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करना तथा जटिल चोटों के प्रबंधन से संबंधित शैक्षणिक एवं व्यावहारिक समझ को मजबूत करना था।

विशेषज्ञों ने बताया प्रशिक्षण एवं टीमवर्क का महत्व

एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. मीनू सिंह ने ट्रॉमा मरीजों को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने में निरंतर प्रशिक्षण, कौशल विकास और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण बताया।

डीन एकेडमिक्स डॉ. सौरभ वार्ष्णेय ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम चिकित्सा एवं नर्सिंग विद्यार्थियों के शैक्षणिक ज्ञान को व्यावहारिक कौशल से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि ट्रॉमा एवं आपातकालीन देखभाल में समयबद्ध निर्णय, बेहतर टीम समन्वय और निरंतर कौशल विकास अत्यंत आवश्यक हैं। ऐसे कार्यक्रम भविष्य के स्वास्थ्यकर्मियों को गंभीर परिस्थितियों में अधिक सक्षम और प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए तैयार करते हैं।

चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डॉ. पुनीत धमीजा ने कहा कि आपातकालीन एवं ट्रॉमा सेवाओं में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों, प्रभावी टीमवर्क और समयबद्ध उपचार की अहम भूमिका होती है।

ट्रॉमा सेंटर के विभागाध्यक्ष एवं आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो. डॉ. क़मर आज़म ने कहा कि विश्व ट्रॉमा सप्ताह का उद्देश्य ट्रॉमा देखभाल की गुणवत्ता में सुधार करना, स्वास्थ्यकर्मियों के कौशल को सुदृढ़ करना तथा समाज में सड़क सुरक्षा और दुर्घटना के बाद समय पर उपचार के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

आयोजन सचिव डॉ. मधुर उनियाल ने कहा कि ATLS प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल आयोजन के बाद ‘नर्स इन ACT’ प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं वैस्कुलर वर्कशॉप का आयोजन ट्रॉमा प्रबंधन और आपातकालीन देखभाल को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने प्रशिक्षण में भाग लेने वाले विद्यार्थियों, विशेषज्ञों, प्रशिक्षकों और आयोजन समिति के सदस्यों के सहयोग की सराहना की।

मुख्य नर्सिंग अधिकारी डॉ. अनीता रानी कंसल ने नर्सिंग शिक्षा में व्यावहारिक प्रशिक्षण की उपयोगिता पर जोर देते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को वास्तविक आपातकालीन परिस्थितियों में जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से समझने और मरीज-केंद्रित देखभाल के लिए तैयार करने में सहायक होते हैं।

आयोजन समिति का योगदान

कार्यक्रम के सफल आयोजन में आयोजन समिति के सदस्य अखिलेश उनियाल, शशिकांत, मेघा भट्ट, मनोज कुमार, पंकज ठाकुर, आदित्य सोम एवं अन्य सदस्यों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

एम्स ऋषिकेश में 11 से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित विश्व ट्रॉमा सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं, सड़क सुरक्षा जागरूकता गतिविधियों और शैक्षणिक आयोजनों के माध्यम से ट्रॉमा प्रबंधन, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं तथा जन-जागरूकता को सुदृढ़ करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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*** संक्षिप्त परिचय / बायोडाटा *** नाम: गोविन्द सिंह पुण्डीर संपादक: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल टिहरी। उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार। पत्रकारिता अनुभव: सन 1978 से सतत सक्रिय पत्रकारिता। विशेषता: जनसमस्याओं, सामाजिक सरोकारों, संस्कृति एवं विकास संबंधी मुद्दों पर गहन लेखन और रिपोर्टिंग। योगदान: चार दशकों से अधिक समय से प्रिंट व सोशल मीडिया में निरंतर लेखन एवं संपादन वर्तमान कार्य: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को नई दिशा प्रदान करना।
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