शहीदों की स्मृति में बौराड़ी में कल से शिव महापुराण कथा
सोमवार को सतेश्वर महादेव मंदिर से निकलेगी भव्य कलश यात्रा, 24 सितंबर तक चलेगा आध्यात्मिक आयोजन
टिहरी गढ़वाल 13 सितम्बर। शहीद सैनिकों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की स्मृति को समर्पित शिव महापुराण कथा का आयोजन रविवार से बौराड़ी स्थित शहीद स्मारक में श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण के बीच शुरू होगा। गंगा विश्व सद्भावना समिति की ओर से आयोजित यह धार्मिक आयोजन 14 से 24 सितंबर तक चलेगा। कथा के शुभारंभ अवसर पर रविवार को सतेश्वर महादेव मंदिर से दोपहर दो बजे शहीद स्मारक तक भव्य कलश यात्रा निकाली जाएगी। आयोजन को लेकर समिति ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
शिव महापुराण कथा में राष्ट्रीय संत डॉ. दुर्गेश आचार्य महाराज श्रद्धालुओं को भगवान शिव की महिमा, सनातन संस्कृति, धर्म, संस्कार और जीवन मूल्यों का संदेश देंगे। नई टिहरी पहुंचने पर समिति पदाधिकारियों एवं श्रद्धालुओं ने संत डॉ. दुर्गेश आचार्य महाराज का स्वागत एवं अभिनंदन किया।
धर्म के साथ संस्कार और सेवा का संदेश
प्रेस वार्ता में डॉ. दुर्गेश आचार्य महाराज ने कहा कि शिव महापुराण केवल कथा श्रवण का माध्यम नहीं, बल्कि मनुष्य को धर्म, सत्य, संस्कार, सेवा और सद्भाव के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला आध्यात्मिक ग्रंथ है। उन्होंने नई पीढ़ी में सनातन संस्कृति और संस्कारों से बढ़ती दूरी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि संस्कारों की नींव मजबूत होगी तो समाज और राष्ट्र भी मजबूत होगा।
उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होना चाहिए। ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने के साथ ही सेवा, सद्भाव और मानव कल्याण का भाव भी जागृत किया जाना चाहिए।
नेपाल की आपदा से हिमालय संरक्षण की सीख लें
डॉ. दुर्गेश आचार्य ने नेपाल में आई आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए विश्व शांति और कल्याण की कामना की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाएं मानव समाज के लिए चेतावनी भी हैं। नेपाल की आपदा से सीख लेते हुए हिमालय और प्रकृति के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।
उन्होंने कहा कि हिमालय केवल पहाड़ों की श्रृंखला नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन, जल और पर्यावरण का आधार है। प्रकृति के साथ अनावश्यक छेड़छाड़ के परिणाम गंभीर हो सकते हैं। इसलिए विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना भी समाज और सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी है।
तीर्थाटन में आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण भी जरूरी
राष्ट्रीय संत ने कहा कि धार्मिक स्थलों की यात्रा को केवल पर्यटन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। तीर्थाटन का मूल भाव श्रद्धा, आत्मिक शांति और आध्यात्मिक अनुभूति है। तीर्थयात्रियों को हिमालय की संवेदनशीलता को समझते हुए स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी सजग रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प जुड़ जाए तो तीर्थाटन समाज में आध्यात्मिक चेतना के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी प्रभावी संदेश दे सकता है।
समिति ने श्रद्धालुओं से की सहभागिता की अपील
गंगा विश्व सद्भावना समिति के अध्यक्ष राकेश राणा ने बताया कि शहीद सैनिकों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की स्मृति में आयोजित इस कथा में श्रद्धालुओं की सहभागिता के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। उन्होंने क्षेत्रवासियों से कलश यात्रा और कथा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की।
डॉ दुर्गेश महाराज जी ने कहा कि टिहरी उत्तरकाशी में कोई मेडिकल कॉलेज नहीं है टिहरी में मेडिकल कॉलेज को लेकर जो आंदोलन चल रहा है उसे मेरा समर्थन है। सरकार को चाहिए कि जन भावना को देखते हुए तत्काल मेडिकल कॉलेज की स्थापना कर लोगों की इस मांग को पूरी करे।
इस अवसर पर गंगा विश्व शांति सद्भावना समिति के अध्यक्ष राकेश राणा, कोषाध्यक्ष महावीर प्रसाद उनियाल, गोविंद सिंह पुंडीर, टैक्सी यूनियन अध्यक्ष टीकम सिंह चौहान, गणेश भट्ट, शैला देवी, विश्व कल्पना भट्ट, अंबिका नैथानी, सोनम भंडारी, अनीता थपलियाल, राम देई रावत, सपना कठैत, रोशनी भट्ट, कपिल उनियाल, कुलदीप नौटियाल, हेमंत नौटियाल, कृष्णा मिश्रा तथा राम रमया सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।




