नेकदिल इन्सान थे लंगर बाबा जगदीश आहुजा — नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज

Govind Pundir
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चंडीगढ़ के ‘लंगर बाबा’ पदमश्री जगदीश आहुजा ने त्यागा संसार, 21 साल से PGI के बाहर चलाया लंगर

चण्डीगढ़। पीजीआई के बाहर करीब 21 साल से लंगर लगाने वाले पदमश्री जगदीश आहूजा के निधन पर समाज के गणमान्य व्यक्तियों ने गहरी संवेदना व्यक्त की है। जूना अखाड़े के प्रमुख सन्त नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने अपने श्रद्धांजलि सन्देश में कहा कि हर उस गरीब की दुआ उनके साथ थी, जिनको इतनी लंबी अवधि में भूखे होने पर खाना परोसा था। एक साल पहले ही उन्हें राष्ट्रपति द्वारा पदमश्री से अलंकृत किया गया था। 4-5 हजार कहना तो आसान है, लेकिन नियमित तौर पर इतने लोगों को रोजाना लंगर परोसना आसान कतई नहीं हो सकता।

लंगरबाबा को श्रद्धांजलि देते रसिक महाराज

देश के बंटवारे के वक्त मात्र 12 साल की उम्र में पंजाब आ गए थे। रेलवे स्टेशन पर नमकीन तक बेची। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक परियाला में उन्होंने गुड व फ्रूट भी बेचा। 1956 में लगभग 21 साल की उम्र में उस समय चंडीगढ़ आ गए थे, जब इस शहर को योजनाबद्ध तरीके से बनाने की कवायद शुरू हुई थी। यहां भी रेहड़ी पर केले बेचने शुरू किए। कैंसर की चपेट में आने से पहले वो खुद गाड़ी में दो से तीन हजार लोगों को खाना खिलाते थे।

जूना अखाड़े के सन्त स्वामी रसिक महाराज ने बताया कि जीवन के लंबे सफर में पदमश्री जगदीश आहूजा ने चंडीगढ़ में कई संपत्तियां भी बनाई, लेकिन लंगर चलाने के लिए धीरे-धीरे अपनी संपत्तियां बेच दी। 21 सालों के इतिहास में केवल कोविड के दौरान पीजीआई के बाहर 7 दिन का लंगर रोकना पड़ा था। उनकी इच्छा थी कि वो चंडीगढ़ में जरूरतमंदों के लिए सराय का निर्माण भी करवाएं। एक साक्षात्कार में लंगर वाले बाबा के नाम से मशहूर जगदीश आहूजा ने कहा था कि जब वो लोगाों को सड़कों पर भूखे पेट देखते हैं तो बेचैनी होने लगती हैै। ये भी जानकारी है कि उन्होंने अपने बेटे के 8वें जन्मदिन पर 100 से 150 बच्चों को खाना खिलाना शुरू किया था। 18 साल तक सैक्टर-23 में घर से लंगर चलाया। 2001 में पीजीआई चंडीगढ़ के बाहर हर दिन लंगर लगाना शुरू कर दिया था। हर कोई दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना कर रहा है।

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*** संक्षिप्त परिचय / बायोडाटा *** नाम: गोविन्द सिंह पुण्डीर संपादक: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल टिहरी। उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार। पत्रकारिता अनुभव: सन 1978 से सतत सक्रिय पत्रकारिता। विशेषता: जनसमस्याओं, सामाजिक सरोकारों, संस्कृति एवं विकास संबंधी मुद्दों पर गहन लेखन और रिपोर्टिंग। योगदान: चार दशकों से अधिक समय से प्रिंट व सोशल मीडिया में निरंतर लेखन एवं संपादन वर्तमान कार्य: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को नई दिशा प्रदान करना।
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