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लचीलेपन और ऊर्जा को अवशोषित करने की क्षमता के कारण भूकंप क्षेत्रों में टिहरी बांध सबसे उपयुक्त प्रकार का बांध है-एल पी जोशी

Govind Pundir
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लचीलेपन और ऊर्जा को अवशोषित करने की क्षमता के कारण भूकंप क्षेत्रों में टिहरी बांध सबसे उपयुक्त प्रकार का बांध है (केंद्रीय क्ले कोर के साथ)।

-एल पी जोशी , ईडी

टिहरी गढ़वाल। टिहरी बांध की सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की चिंता या शक करने की जरुरत नहीं है, बांध पूर्णतः सुरक्षित है। बांध राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों पर  खरा है। बांध निर्माण के दौरान सुरक्षा की दृष्टि से सभी  प्रकार के अध्ययन कराये गए हैं सभी  अध्ययनों में बांध  खरा उतरा है। यह बात टीएचडीसी के अधिशासी निदेशक श्री एल पी जोशी ने भागीरथी पुरम कार्यालय में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कही।

श्री एल पी जोशी ईडी
  • टिहरी बांध का भूकंपरोधी डिजाइन
  •  बांध के डिज़ाइन की जांच दो अलग-अलग एजेंसियों (भूकंप इंजीनियरिंग विभाग, रूड़की विश्वविद्यालय और मैसर्स एचपीआई, मॉस्को) द्वारा स्वतंत्र रूप से की गई थी। दोनों स्वतंत्र रूप से इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि बांध टिहरी क्षेत्र में आने वाले संभावित भूकंपीय झटकों को झेलने के लिए सक्षम एवं सुरक्षित है । फरवरी, 1998 में विशेषज्ञ समूह इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि बांध का डिज़ाइन, जैसा कि अपनाया गया है, टिहरी में आने वाले अधिकतम विश्वसनीय भूकंप (एमसीई) का सामना करने के लिए संरचनात्मक रूप से सुरक्षित होगा।
  • 1990 में महानिदेशक, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की अध्यक्षता में भारत सरकार द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय समिति, जिसमें भूवैज्ञानिक और भूकंपविज्ञानी शामिल थे, ने यह निष्कर्ष निकला कि टिहरी डैम, बांध की सीट के नीचे 15 किमी पर होने वाले 8 (+) रिक्टर पैमाने के भूकंप के लिए भी सुरक्षित है।
  • इसके बाद, सरकार ने उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट को प्रतिष्ठित भूकंप विशेषज्ञ, रूड़की विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जय कृष्णा को भेजा। उन्होंने भी अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की कि बांध खंड क्षेत्र की भूकंपीयता की दृष्टि से सुरक्षित है।
  • बांध की भूकंपीय स्थिरता की जांच 1992 में गज़ली भूकंप (1976) के वास्तविक एक्सेलेरोग्राम के मुकाबले मेसर्स एचपीआई, मॉस्को द्वारा की गई थी। बांध का डिजाइन सुरक्षित पाया गया।
  • टिहरी बांध को गजली भूकंप के विस्तारित एक्सेलेरोग्राम के विरुद्ध तीन बार लगाकर परीक्षण किया गया और बांध सुरक्षित पाया गया।
  • प्रसिद्ध पर्यावरणविद् श्री सुंदर लाल बहुगुणा जी के आंदोलन और अनशन को देखते हुए एवं देश के कुछ हिस्सों में बांध की सुरक्षा के मद्देनज़र, भारत सरकार द्वारा बांध सुरक्षा की समीक्षा हेतु अगस्त 1996  में श्री बहुगुणा द्वारा सुझाये गए पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समूह का गठन किया गया । विशेषज्ञ समूह भी इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि टिहरी बांध अधिकतम विश्वसनीय भूकंप का सामना करने के लिए संरचनात्मक रूप से सुरक्षित है ।

यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि शायद दुनिया की किसी भी अन्य बांध परियोजना को उसकी भूकंपीय स्थिरता के संबंध में इतनी गहन, बार-बार जांच/मूल्यांकन के अधीन नहीं किया गया है, जितना कि टिहरी बांध को।

  • अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम फिल्टर का प्रावधान

टिहरी बाँध के केन्द्रीय कोर के टूटने की किसी भी अप्रत्याशित घटना के मामले में, अपस्ट्रीम फिल्टर की सामग्री दरारों में बह जाएगी और उन्हें सील कर देगी। 

  • टिहरी बाँध का उच्च घनत्व

भूकंप के दौरान डिफरेंशियल सेटलमेंट और पोर प्रेशर की संभावना को कम करने के लिए, शेल में 2.36 टी/एम³ और कोर जोन में 1.90 टी/एम³ का घनत्व हासिल किया गया है।

  • इंस्ट्रुमेंटेशन योजना:

निर्माण अवधि के दौरान और साथ ही कमीशनिंग के बाद परिचालन अवधि के दौरान बांध के प्रदर्शन की निगरानी के लिए, 145 डिफरेंशियल सेटलमेंट बिंदु के साथ-साथ, पोर प्रेशर, रिसाव, तापमान इत्यादि को मापने के लिए बांध और बांध की नींव में लगभग 350 उपकरणों का प्रावधान किया गया है। 

  • दो निरीक्षण दीर्घाएँ

बांध के व्यवहार का भौतिक निरीक्षण करने, स्ट्रांग मोशन एक्सेलेरोग्राफ को समायोजित करने और बांध कोर की 3डी गति का निरीक्षण करने के लिए बांध के कोर (एक मध्य ऊंचाई पर और दूसरा शिखर/शीर्ष के पास) में दो निरीक्षण दीर्घाएँ निर्मित की गयी हैं।

  • स्पिलवे व्यवस्थाएँ

टिहरी बांध की स्पिलवे प्रणाली में एक शूट स्पिलवे और चार शाफ्ट स्पिलवे शामिल हैं। यह देश का एकमात्र स्पिलवे सिस्टम है जिसे 15540 क्यूमेक्स की संभावित अधिकतम बाढ़ (पीएमएफ) के लिए डिज़ाइन किया गया है। टिहरी बांध के लिए पीएमएफ 10,000 वर्षों में से 1 बाढ़ आवृत्ति के अनुरूप है ।


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*** संक्षिप्त परिचय / बायोडाटा *** नाम: गोविन्द सिंह पुण्डीर संपादक: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल टिहरी। उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार। पत्रकारिता अनुभव: सन 1978 से सतत सक्रिय पत्रकारिता। विशेषता: जनसमस्याओं, सामाजिक सरोकारों, संस्कृति एवं विकास संबंधी मुद्दों पर गहन लेखन और रिपोर्टिंग। योगदान: चार दशकों से अधिक समय से प्रिंट व सोशल मीडिया में निरंतर लेखन एवं संपादन वर्तमान कार्य: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को नई दिशा प्रदान करना।
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