आर्यभट्ट से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक: विकसित भारत की ओर गणितीय पथ

Govind Pundir
3 Min Read
Please click to share News

खबर को सुनें

ऋषिकेश 26 फरवरी 2026। श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय के पं. एल. एम. एस. परिसर, ऋषिकेश स्थित गणित विभाग द्वारा 26 फरवरी 2026 को “आर्यभट्ट से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक: विकसित भारत की ओर गणितीय पथ” विषय पर एक प्रेरणादायक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय गणित की समृद्ध परंपरा को आधुनिक तकनीकी युग से जोड़ते हुए “विकसित भारत” के निर्माण में उसकी भूमिका को रेखांकित करना था।
संगोष्ठी में महान गणितज्ञ आर्यभट्ट के योगदानों से लेकर वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, कम्प्यूटेशनल मॉडलिंग और तकनीकी नवाचार में गणित की केंद्रीय भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई। विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. सती ने विभाग को सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि ऐसे अकादमिक कार्यक्रम विद्यार्थियों में शोध के प्रति रुचि जागृत करते हैं और राष्ट्र-निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं।
गणित विभागाध्यक्ष प्रो. अनीता तोमर ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि भारत की गणितीय विरासत अत्यंत समृद्ध और दूरदर्शी रही है। उन्होंने ब्रह्मगुप्त, भास्कराचार्य और श्रीनिवास रामानुजन जैसे महान गणितज्ञों के योगदानों का उल्लेख करते हुए कहा कि शून्य, दशमलव पद्धति, बीजगणित और अनंत श्रेणियों जैसे सिद्धांत आज भी आधुनिक गणना, अंतरिक्ष अनुसंधान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की आधारशिला हैं। उन्होंने अंतर्विषयी शोध पर बल देते हुए युवाओं से गणित को डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, क्रिप्टोग्राफी और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों से जोड़ने का आह्वान किया।
प्रो. दीपा शर्मा ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग का मूल आधार रेखीय बीजगणित, प्रायिकता, सांख्यिकी और कलन जैसे गणितीय सिद्धांत हैं। डॉ. पवन जोशी ने गणित को वैज्ञानिक प्रगति की आधारशिला बताते हुए विद्यार्थियों को शोध-उन्मुख दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा दी।
शोधार्थी शिवानी नेगी, मनीष प्रकाश और प्रियंका पुंडीर ने विषय पर प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें प्राचीन भारतीय गणित और आधुनिक एआई के बीच संबंध को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से स्पष्ट किया गया। कुलपति प्रो. एन. के. जोशी ने अपने संदेश में कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए महत्वपूर्ण बताया।
प्रश्नोत्तर सत्र के साथ संपन्न हुई यह संगोष्ठी विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक सिद्ध हुई। कार्यक्रम ने भारतीय गणितीय परंपरा और आधुनिक तकनीकी विकास के बीच एक सशक्त सेतु स्थापित किया।


Please click to share News
Share This Article
Follow:
*** संक्षिप्त परिचय / बायोडाटा *** नाम: गोविन्द सिंह पुण्डीर संपादक: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल टिहरी। उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार। पत्रकारिता अनुभव: सन 1978 से सतत सक्रिय पत्रकारिता। विशेषता: जनसमस्याओं, सामाजिक सरोकारों, संस्कृति एवं विकास संबंधी मुद्दों पर गहन लेखन और रिपोर्टिंग। योगदान: चार दशकों से अधिक समय से प्रिंट व सोशल मीडिया में निरंतर लेखन एवं संपादन वर्तमान कार्य: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को नई दिशा प्रदान करना।
error: Content is protected !!