कृष्ण कथा अमृत तत्व का रस है: डॉ. दुर्गेश आचार्य

टिहरी गढ़वाल। राष्ट्रीय संत डॉ. दुर्गेश आचार्य ने कहा कि कृष्ण कथा अमृत स्वरूप है, जिसे सुनने से मनुष्य को परम आनंद की प्राप्ति होती है। उन्होंने बताया कि जब इंद्रियां श्रीकृष्ण में लीन हो जाती हैं, तब जीवन में शाश्वत सुख प्राप्त होता है।
उन्होंने वेदांत के सिद्धांत “रसो वै सः” का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रभु के आनंद रस का अनुभव ही रासलीला का वास्तविक अर्थ है।
डॉ. आचार्य ने श्रीकृष्ण की लीलाओं को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए कहा कि पूतना वध अज्ञान के नाश का प्रतीक है, तृणावर्त वध वायु शुद्धि का संदेश देता है, जबकि मिट्टी खाने की लीला पृथ्वी तत्व की पवित्रता को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि रासायनिक खाद और विषैले पदार्थों के कारण भूमि की उर्वरता घट रही है, जिससे अन्न की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। कालिय नाग दमन को जल शुद्धि का संदेश बताते हुए उन्होंने नदियों में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताई और इसे गंभीर बीमारियों का कारण बताया।
गोवर्धन लीला के माध्यम से भगवान कृष्ण ने प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश की रक्षा करना ही सच्ची भक्ति है।



