चमोली 17 जून । गोविंदघाट गुरुद्वारा प्रबंधक सेवा सिंह द्वारा हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील का स्वागत करते हुए सनातन धर्म विकास परिषद उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है, जहां सभी धर्मों और संप्रदायों के श्रद्धालु आस्था और श्रद्धा के साथ आते हैं। ऐसे में यात्रा मार्ग पर शांति, अनुशासन और आपसी भाईचारा बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि श्री हेमकुंड साहिब, चारधाम और अन्य धार्मिक स्थलों की यात्राएं केवल दर्शन का माध्यम नहीं बल्कि आध्यात्मिक साधना और मानवता को जोड़ने का अवसर भी हैं। किसी भी प्रकार के विवाद, उग्रता या हथियारों के प्रदर्शन से धार्मिक यात्राओं की गरिमा प्रभावित होती है।
उन्होंने कहा कि सिख धर्म और सनातन संस्कृति दोनों ही मानवता, सेवा, त्याग और कमजोरों की रक्षा का संदेश देते हैं। सेवा सिंह द्वारा यह कहना कि कृपाण और शस्त्र किसी पर आक्रमण करने के लिए नहीं बल्कि मजलूमों की रक्षा के लिए धारण किए जाते हैं, धार्मिक मर्यादाओं के अनुरूप और समाज को सकारात्मक संदेश देने वाला है।
स्वामी रसिक महाराज ने श्रद्धालुओं से अपील की कि यात्रा के दौरान यदि किसी प्रकार की समस्या या विवाद उत्पन्न हो तो कानून को अपने हाथ में लेने के बजाय प्रशासन और पुलिस की सहायता लें। उन्होंने स्थानीय लोगों से भी यात्रियों के प्रति सहयोग और सम्मान का भाव रखने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान शांति, आध्यात्मिकता और धार्मिक सद्भाव से है। यहां आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु सुखद अनुभव लेकर जाए, यही हम सबकी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने सभी धर्मों के अनुयायियों से प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।
स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि देवभूमि से पूरे देश को एकता, शांति और सर्वधर्म समभाव का संदेश जाना चाहिए, जिससे उत्तराखंड की गौरवशाली परंपरा और अधिक मजबूत हो सके।




