टिहरी गढ़वाल 8 जुलाई। उत्तराखंड राज्य आन्दोलनकारी मंच, टिहरी गढ़वाल ने धरना प्रदर्शन कर बुधवार को जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर देवभूमि परिवार कानून में शामिल होने के लिए निर्धारित 15 वर्ष की कट-ऑफ अवधि का विरोध किया। मंच ने इस अवधि को बढ़ाकर वर्ष 1985 तक लागू करने की मांग उठाई।
ज्ञापन में मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि राज्य सरकार पहले ही मूल निवास प्रमाण पत्र की अनिवार्यता समाप्त कर प्रदेश के मूल निवासियों की भावनाओं की अनदेखी कर चुकी है। अब देवभूमि परिवार कानून के तहत 15 वर्ष का निवास पूरा करने वाले व्यक्तियों को पंजीकरण और विभिन्न सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ देने का प्रावधान भी मूल निवासियों के अधिकारों और हितों को प्रभावित करेगा।
मंच के संयोजक देवेंद्र नौडियाल, अध्यक्ष डॉ राकेश भूषण गोदियाल का कहना है कि सरकार एक ओर उत्तराखंड में जनसंख्या परिवर्तन (डेमोग्राफी चेंज) पर चिंता व्यक्त करती है, वहीं दूसरी ओर 15 वर्ष की समय सीमा निर्धारित कर ऐसे लोगों को भी देवभूमि परिवार कानून के दायरे में ला रही है, जो लंबे समय बाद प्रदेश में बसने आए हैं। इससे राज्य के मूल निवासियों की भावनाओं को ठेस पहुंचेगी और उनके अधिकार सीमित हो सकते हैं।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि प्रदेश में बाहरी राज्यों के अपराधियों की गतिविधियां बढ़ रही हैं। भविष्य में ऐसे लोग भी इस कानून के तहत पंजीकृत हो सकते हैं, जिससे देवभूमि की पहचान और छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
उत्तराखंड राज्य आन्दोलनकारी मंच के अध्यक्ष डॉ राकेश भूषण गोदियाल ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि देवभूमि परिवार कानून में शामिल होने की कट-ऑफ अवधि 15 वर्ष के बजाय वर्ष 1985 (लगभग 40 वर्ष) निर्धारित की जाए, ताकि राज्य के मूल निवासियों के हितों और जनभावनाओं की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
मंच ने उम्मीद जताई कि सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार करते हुए उत्तराखंड के मूल निवासियों के हित में उचित निर्णय लेगी।
इस मौके पर उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच के अध्यक्ष डॉ. राकेश भूषण गोदियाल, संयोजक देवेंद्र नौडियाल, कांग्रेस शहर अध्यक्ष कुलदीप पंवार, सभासद नगर पालिका चम्बा शक्ति जोशी, राजेंद्र अग्रवाल, व्यापार मंडल अध्यक्ष भगवान सिंह रावत, कमल सिंह महर, जगजीत सिंह नेगी, गंगा भगत सिंह नेगी, टीकम चौहान, डॉ. यू.एस. नेगी सहित मंच के कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।




