नई शिक्षा नीति के अनुरूप स्किल बेस्ड कोर्स, रिमोट सेंसिंग-जीआईएस, बायोटेक्नोलॉजी और इंटरनेशनल योग सेंटर की तैयारी
टिहरी गढ़वाल 12 अगस्त। श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय, बादशाहीथौल में शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप विद्यार्थियों को नौकरी के साथ-साथ स्वरोजगार और स्टार्टअप के लिए तैयार करने पर विशेष जोर दिया है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अमरीश महाजन ने बताया कि क्वालिटी एजुकेशन के साथ आउटकम बेस्ड एजुकेशन को प्राथमिकता दी जा रही है। इस दिशा में IQAC सेल, प्राध्यापकों और कैंपस निदेशकों के साथ बैठक कर पाठ्यक्रमों में स्किल बेस्ड, एम्प्लॉयबिलिटी बेस्ड, इवैल्यूएटेड तथा SWAYAM और SWAYAM Plus के पाठ्यक्रमों को शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी विभागों को बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक कर इन पाठ्यक्रमों को जल्द से जल्द पाठ्यक्रम में समाहित करने के लिए कहा गया है।
हर छात्र लगाएगा दो पौधे
विश्वविद्यालय ने पर्यावरण संरक्षण को भी विद्यार्थियों की शिक्षा से जोड़ने का निर्णय लिया है। नए शैक्षणिक सत्र से प्रत्येक विद्यार्थी को दो पौधे लगाने होंगे। विद्यार्थी अपने घर अथवा उपयुक्त स्थान पर पौधारोपण कर उनकी नियमित देखभाल करेगा तथा पौधों की वृद्धि का रिकॉर्ड फोटो एलबम के माध्यम से तैयार करेगा। इस कार्य को तीन सेमेस्टर तक जारी रखते हुए विद्यार्थियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
पौधारोपण गतिविधि को विश्वविद्यालय द्वारा दो क्रेडिट के पाठ्यक्रम से जोड़ने की योजना है। विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में करीब एक लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। यदि सभी विद्यार्थी इस अभियान में भाग लेते हैं तो प्रदेश में बड़े स्तर पर पौधारोपण होने के साथ आने वाले वर्षों में उत्तराखंड को और अधिक हरा-भरा बनाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
नए और रोजगारपरक पाठ्यक्रमों की तैयारी
विश्वविद्यालय भविष्य की जरूरतों को देखते हुए रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस, बायोटेक्नोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री जैसे विषयों में नए पाठ्यक्रम शुरू करने की दिशा में भी काम कर रहा है। इसके अलावा ऋषिकेश की योग और आध्यात्मिक पहचान को देखते हुए इंटरनेशनल योग सेंटर की स्थापना का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है।
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इन चारों महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के प्रस्ताव शासन को भेजने की तैयारी कर रहा है। प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद इन क्षेत्रों में नए शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जा सकेंगे।
कुलपति ने कहा कि उत्तराखंड धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में विद्यार्थियों को स्थानीय संसाधनों, पर्यटन, योग, पर्यावरण और आधुनिक तकनीक से जोड़कर उनकी क्षमता का विकास करना विश्वविद्यालय की प्राथमिकताओं में शामिल है।





