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ऑपरेशन स्माइल और ऑपरेशन शिनाख्त एक दिसंबर से

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मुस्कान बिखेरने आ रहा है ऑपरेशन इस्माइल और ऑपरेशन शिनाख़्त-डीजीपी (अपराध)

देहरादून * गढ़ निनाद, 30 नवंबर 2019

महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था, उत्तराखण्ड अशोक कुमार ने बताया कि प्रदेश में एक दिसम्बर 2019 से दो  माह के लिए “ऑपरेशन इस्माइल व ऑपरेशन शिनाख़्त” अभियान चलाया जाएगा। जिसमें वर्ष 2000 से अभी तक तलाश हेतु शेष पंजीकृत गुमशुदा बच्चों, महिलाओं व पुरुषों की तलाश की जाएगी साथ ही गुमशुदाओं का मिलान लावारिश शवों से भी कराया जायेगा।

अशोक कुमार ने बताया कि अभियान के अंतर्गत वर्ष 2015 से माह फरवरी 2018 तक उत्तराखण्ड (868) और अन्य प्रदेशों (693) के कुल 1561 गुमशुदा बच्चों को बरामद किया गया। इसके साथ ही वर्ष 2018 में दिनांक 01-05-2018 से 20-07-2018 तक चलाये गये “ऑपरेशन शिनाख़्त” अभियान में कुल 68 अज्ञात शवों की शिनाख़्त की गयी और कुल 424 गुमशुदा लोगों को बरामद किया गया।

उन्होंने बताया कि अभियान के अंतर्गत जनपद देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल व ऊधमसिंह नगर में पांच-पांच तलाशी टीम व शेष जनपदों में दो दो तलाशी टीमों का गठन किया गया है। प्रत्येक टीम में एक उपनिरीक्षक एवं चार आरक्षी रहेंगे। तलाशी टीम में गुमशुदा/बरामद बच्चों व महिलाओं से पूछताछ हेतु एक महिला पुलिसकर्मी को भी अनिवार्य रूप से नियुक्त किया गया है। टीमों की सहायता हेतु एक एक विधिक एवं टेक्निकल टीम का भी गठन किया गया है।

उन्होंने बताया कि जनपद देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल व ऊधमसिंहनगर में एक अपर पुलिस अधीक्षक व अन्य जनपदों में पुलिस उपाधीक्षक को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। मुख्यालय स्तर पर अभियान की नोडल अधिकारी श्रीमती ममता वोहरा, अपर पुलिस अधीक्षक, अपराध एवं कानून व्यवस्था,उत्तराखण्ड हैं।

अशोक कुमार ने निर्देश दिए कि बरामद बच्चों के सम्बन्ध में यदि किसी अपराध का होना पाया जाए तो सम्बन्धित के विरूद्ध तत्काल अभियोग दर्ज कर कार्यवाही की जाए। तथा अभियान प्रारम्भ करने से पूर्व प्रत्येक जनपद में एक वर्कशाप का आयोजन किया जाए।

उक्त अभियान हेतु अन्य सम्बन्धित विभागों/संस्थाओं तथा सीडब्लूसी, समाज कल्याण विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, अभियोजन, श्रम विभाग, संप्रेक्षण गृह, एनजीओ एवं चाइल्ड हेल्प लाईन से समन्वय स्थापित कर इनसे भी सहयोग लेने के निर्देश दिए हैं। साथ ही शेल्टर होम्स/ ढाबों/कारखानों/बस अड्डों/रेलवे स्टेशन आदि में भी अभियान चलाया जाए ताकि अपने जनपद के साथ-साथ अन्य जनपदों के गुमशुदा बच्चों को भी तलाश किया जा सके।

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