हे कृषक देव तुम हो महान , जन – जन की तुम हो शान! बहाकर श्वेद खेत – खलिहान , हर मानव मे फूँकते हो जान । रात – दिन दोनों को कर एक , अचम्भा होता सबको देख ! भोर होते ही नंगे तन – पैर , खेत खलिहानों की करते सैर । लेकर फावड़ा हाथ दराँती , करते काम खेतों मे कई भाँति । कन्धे मे हल हाथ कुदाली , लेकर के हर डाली पाली । बैल ट्रैक्टर साधन जो भी हो , साथ देते तुम्हारा हर पल ओ । बच्चे बूढ़ौ को छोड़कर घर मे , ढोते रहते बोझ को सिर मे । मेहनत – कीमत लगती जादा , पर होता है लाभ सिर्फ आधा । किसान जो अन्न न पैदा करता , तो तब मानव भूखा ही मरता । हे अन्न दाता तेरा जीवन सारा , अभावों मे बीतता बन बेचारा ! उज्जवल होगा भविष्य तुम्हारा , सोच रहा अब जग है सारा । खुद भूखे – नंगे रहते हो सदा , दुनियां को भरपेट खिलाता , छू न सका कभी पद – प्रतिष्ठा । औरों को खूब सम्मान दिलाता । कर्ज – श्रम की गठरी से तेरा , कभी न टूटा रिश्ता – नाता । जिनको तूने धनवान बनाया , वह तुझको सदा रहा सताता ! नमन करते हिम्मत को तेरी , कभी भी हार नहीं मानी । ग्राम देवता हे अन्न दाता , दर्द भरी है तेरी कहानी !! छप्पर – झोपड़ियों मे रहकर , औरों को महल प्रदान किये । -पेट – पीठ सिकुड़कर एक हुआ , जीवन भर जहर के घूँट पिये ! सामाजिक/प्राकृतिक अत्याचार , सहता रहता है हर बार ! पर मानता नहीं कभी तू हार , हिम्मत का पर्याय बनता हर बार ।
*** संक्षिप्त परिचय / बायोडाटा *** नाम: गोविन्द सिंह पुण्डीर संपादक: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल टिहरी। उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार। पत्रकारिता अनुभव: सन 1978 से सतत सक्रिय पत्रकारिता। विशेषता: जनसमस्याओं, सामाजिक सरोकारों, संस्कृति एवं विकास संबंधी मुद्दों पर गहन लेखन और रिपोर्टिंग। योगदान: चार दशकों से अधिक समय से प्रिंट व सोशल मीडिया में निरंतर लेखन एवं संपादन
वर्तमान कार्य: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को नई दिशा प्रदान करना।