विद्यालय समय परिवर्तन और रिक्त पदों पर अशासकीय शिक्षक संघ का विरोध: ‘उत्तराखंड की भौगोलिक चुनौतियों को नजरअंदाज न करें’

Govind Pundir
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देहरादून, 9 जनवरी 2026: उत्तराखंड के राजकीय एवं राजकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में विद्यालय खुलने-बंद होने के समय में प्रस्तावित बदलाव का अशासकीय माध्यमिक शिक्षक संघ ने कड़ा विरोध जताया है। संघ ने रिक्त पदों को पुनर्जीवित करने की समय सीमा तीन महीने से बढ़ाकर तीन वर्ष करने तथा वित्त विभाग से अनुमति की शर्त पर भी आपत्ति दर्ज की है।

संघ के प्रांतीय अध्यक्ष संजय बिजल्वाण और महामंत्री महादेव मैठाणी ने कहा कि उत्तराखंड की विषम भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखा जाए। मैदानी इलाकों में गर्मियों में दोपहर एक बजे बाद पढ़ाई के लिए मौसम अनुकूल नहीं रहता, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में सर्दियों में सुबह 8:50 बजे पहुंचना दूरदराज के बच्चों के लिए असंभव है। जंगली जानवरों का खतरा भी बढ़ रहा है, इसलिए पुराना समय सारणी ही यथावत रखी जाए।संघ ने अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में तीन माह से अधिक रिक्त पदों को पुनर्जीवित करने के नियम को तीन वर्ष करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती पर अघोषित रोक लगी हुई है, जिसके लिए शासन-विभाग जिम्मेदार हैं। विद्यालयी शिक्षा अधिनियम में शिक्षा निदेशक को यह अधिकार है, लेकिन वित्त विभाग से अनुमति मांगना अधिनियम का उल्लंघन है। उच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद चल रही भर्ती प्रक्रियाओं को उलझाया जा रहा है, जिससे शिक्षक कमी के कारण छात्रों का भविष्य खतरे में है।संघ ने भर्ती पर रोक हटाने और तत्काल प्रक्रिया शुरू करने की मांग की।

इस अवसर पर प्रांतीय कोषाध्यक्ष मनमोहन सिंह नेगी, उपाध्यक्ष दीपक मिश्रा, मदन मैखुरी, डॉ. योगेश जोशी, मंत्री सुनील पैन्यूली समेत गढ़वाल-कुमाऊं मंडल अध्यक्ष शिव सिंह रावत, विशन सिंह मेहरा, देहरादून जिलाध्यक्ष अनिल नौटियाल, टिहरी शिव सिंह रावत, चमोली नरेंद्र सिंह रावत, रुद्रप्रयाग बलवीर सिंह रौथाण, पौड़ी देवेंद्र कुमार, अल्मोड़ा हीरा सिंह मेहरा, हरिद्वार अरविंद सैनी, ऊधम सिंह नगर उदय प्रताप सिंह आदि उपस्थित रहे।

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*** संक्षिप्त परिचय / बायोडाटा *** नाम: गोविन्द सिंह पुण्डीर संपादक: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल टिहरी। उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार। पत्रकारिता अनुभव: सन 1978 से सतत सक्रिय पत्रकारिता। विशेषता: जनसमस्याओं, सामाजिक सरोकारों, संस्कृति एवं विकास संबंधी मुद्दों पर गहन लेखन और रिपोर्टिंग। योगदान: चार दशकों से अधिक समय से प्रिंट व सोशल मीडिया में निरंतर लेखन एवं संपादन वर्तमान कार्य: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को नई दिशा प्रदान करना।
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