टिहरी बांध विस्थापितों की पंचायती भूमि पर अधिकार को लेकर विवाद, डीएम से जांच की मांग
टिहरी गढ़वाल। टिहरी बांध परियोजना से विस्थापित 24 परिवारों ने जौलीग्रांट स्थित अठूरवाला ग्राम पंचायत के बागी मोहल्ला पुनर्वास स्थल की एक एकड़ पंचायती भूमि को लेकर उत्पन्न विवाद पर जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल से जांच की मांग की है। विस्थापितों का कहना है कि उक्त भूमि पर चारों गांवों—डिबनू, कुलणा, पडियार और मोलधार—के साथ-साथ अठूरबागी गांव के विस्थापित परिवारों का समान अधिकार है।

विस्थापित लाखीराम अमोला के अनुसार वर्ष 1983-84 में टिहरी बांध परियोजना से प्रभावित टिहरी जनपद के डिबनू गांव से 12, कुलणा से 6, पडियार से 1, मोलधार से 1 और अठूरबागी गांव से 37 परिवारों को देहरादून जनपद के जौलीग्रांट स्थित अठूरवाला ग्राम पंचायत के बागी मोहल्ला क्षेत्र में पुनर्वासित किया गया था। बाद में वर्ष 2011-12 में जौलीग्रांट एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के चलते अठूरबागी गांव के 33 परिवारों को विस्थापन नीति के तहत भूमि के बदले भूमि देते हुए ऋषिकेश के गुमानीवाला क्षेत्र में पुनर्वासित कर दिया गया, जबकि शेष 24 परिवार आज भी बागी मोहल्ला क्षेत्र में निवास कर रहे हैं।
अमोला का कहना है कि वर्तमान पुनर्वास स्थल पर 48 एकड़ कृषि भूमि के अतिरिक्त एक एकड़ पंचायती भूमि राजस्व अभिलेखों में ग्राम पंचायत अठूरवाला के नाम दर्ज है। इसी भूमि पर सरकारी व्यय से पंचायत घर, शिव मंदिर एवं ट्यूबवेल का निर्माण भी किया गया है।
आरोप है कि गुमानीवाला में पुनर्वासित किए गए अठूरबागी गांव के कुछ परिवार अब इस एक एकड़ पंचायती भूमि को केवल अपना बताते हुए अन्य गांवों के विस्थापित परिवारों के अधिकार को नकार रहे हैं, जिससे क्षेत्र में असंतोष की स्थिति बनी हुई है।
विस्थापित ने यह भी बताया कि पुनर्वास स्थल पर आज तक सभी गांवों के लिए पितृ स्थल, कुल देवी-देवताओं के मंदिर, बच्चों के पार्क, खेल मैदान, प्राथमिक विद्यालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, बारात घर जैसी मूलभूत सामुदायिक सुविधाओं के लिए भूमि चिन्हित नहीं की गई है, जबकि उपलब्ध पंचायती भूमि के बावजूद सुविधाओं का अभाव बना हुआ है।
कुछ दिन पूर्व विस्थापित प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल से मुलाकात कर पूरे प्रकरण से अवगत कराया, जिस पर जिलाधिकारी ने जांच का आश्वासन दिया था।
विस्थापित परिवारों की ओर से लाखीराम अमोला ने स्पष्ट कहा कि, “यह पंचायती भूमि किसी एक गांव की नहीं, बल्कि पुनर्वास स्थल पर बसे चारों गांवों के विस्थापित परिवारों की साझा भूमि है। प्रशासन को इसका निष्पक्ष स्थलीय सत्यापन कराना चाहिए।”
विस्थापितों ने मांग की है कि ग्राम पंचायत अठूरवाला के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज खसरा संख्या 192, 193A एवं 194 (कुल रकबा 0.3830 हेक्टेयर) की जांच कर स्थलीय मौका मुआयना कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भूमि का वास्तविक अधिकार किन-किन पुनर्वासित परिवारों को है।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन जांच के बाद इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद का क्या समाधान निकालता है।



