ऋषिकेश परिसर में IPR पर कार्यशाला, नवाचार और पेटेंट जागरूकता पर जोर

मौलिक विचारों की कानूनी सुरक्षा आज की आवश्यकता : प्रो. एम.एस. रावत
ऋषिकेश, 18 मार्च 2026। पंडित ललित मोहन शर्मा परिसर, श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय, ऋषिकेश में बुधवार को उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) के तत्वावधान में “बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR)” विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को नवाचार और पेटेंट प्रक्रिया की जानकारी प्रदान करना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ परिसर निदेशक प्रो. एम.एस. रावत, यूकॉस्ट के वैज्ञानिक एवं मुख्य वक्ता हिमांशु गोयल, संकायाध्यक्ष विज्ञान प्रो. एस.पी. सती, IQAC एवं IPR प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. जी.के. ढींगरा तथा डॉ. एस.के. कुडियाल द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एन.के. जोशी ने अपने संदेश में कहा कि इस प्रकार के आयोजन शोध और उद्यमिता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने राज्य में IPR जागरूकता बढ़ाने के लिए ऐसे कार्यक्रमों को निरंतर आयोजित करने पर बल दिया।
मुख्य वक्ता हिमांशु गोयल ने बौद्धिक संपदा अधिकारों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क एवं डिजाइन से जुड़े कानूनी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत में प्रतिवर्ष लगभग एक लाख पेटेंट दाखिल किए जा रहे हैं और नवाचार को संरक्षित कर व्यावसायिक सफलता हासिल की जा सकती है।
परिसर निदेशक प्रो. एम.एस. रावत ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में अपने मौलिक विचारों और शोध कार्यों को कानूनी संरक्षण देना अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने नवाचार को बढ़ावा देने और उसे पेटेंट के माध्यम से आर्थिक अवसरों में बदलने पर जोर दिया।
संकायाध्यक्ष विज्ञान प्रो. एस.पी. सती ने यूकॉस्ट की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि संस्था राज्य के युवाओं और वैज्ञानिकों को तकनीकी सहयोग प्रदान कर रही है। वहीं प्रो. जी.के. ढींगरा ने स्वागत संबोधन में IPR की समझ को नवाचार के लिए अनिवार्य बताया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. एस.के. कुडियाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रश्नोत्तर सत्र में शोधार्थियों ने शोध पत्र प्रकाशन और पेटेंट के बीच अंतर सहित विभिन्न विषयों पर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
कार्यशाला में विश्वविद्यालय के छात्र, शोधार्थी एवं संकाय सदस्यों ने सक्रिय सहभागिता की। अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।



