टिहरी में आपदा प्रबंधन की परख: मॉक ड्रिल में दिखा बेहतर समन्वय और त्वरित कार्रवाई

सड़क दुर्घटना, भूस्खलन और वनाग्नि पर राहत-बचाव का यथार्थ अभ्यास, विभिन्न एजेंसियों ने निभाई अहम भूमिका
टिहरी गढ़वाल, 18 मार्च 2026। जनपद में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने और विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से बुधवार को जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, टिहरी गढ़वाल के तत्वावधान में व्यापक मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। यह अभ्यास सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक अलग-अलग स्थानों पर विभिन्न आपदा परिदृश्यों के अनुसार सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

मॉक ड्रिल के तहत सड़क दुर्घटना, भूस्खलन (लैंडस्लाइड) और वनाग्नि जैसी संभावित आपदाओं को आधार बनाकर अलग-अलग इंसिडेंट एरिया चिन्हित किए गए। इन स्थानों पर पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन सेवा, एसडीआरएफ, लोक निर्माण विभाग और विद्युत विभाग सहित विभिन्न आपातकालीन एजेंसियों ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया। इस दौरान घायलों के रेस्क्यू, प्राथमिक उपचार, अस्पताल पहुंचाने और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को समयबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया।
देवप्रयाग में सड़क दुर्घटना का परिदृश्य:
तहसील देवप्रयाग क्षेत्र में सुबह 9:45 बजे कंट्रोल रूम को वाहन दुर्घटना की सूचना दी गई। सूचना मिलते ही राजस्व, पुलिस, फायर, एसडीआरएफ और मेडिकल टीम मौके के लिए रवाना हुईं। घटनास्थल पर दो घायलों को प्राथमिक उपचार देने के बाद 10:09 बजे एंबुलेंस से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बागी भेजा गया। इसके बाद सभी टीमें स्टेजिंग एरिया पर लौटकर समन्वय बैठक में शामिल हुईं।

नरेंद्र नगर में भूस्खलन की स्थिति:
एनएच ऋषिकेश-चंबा मार्ग पर बगड़धार के समीप भूस्खलन की घटना का अभ्यास किया गया, जिसमें एक बोलेरो वाहन दबने का परिदृश्य बनाया गया। वाहन में सवार चार लोगों में दो की मृत्यु और दो के घायल होने की स्थिति दर्शाई गई। घायलों को एंबुलेंस के माध्यम से उप जिला अस्पताल नरेंद्र नगर पहुंचाया गया, जबकि जेसीबी मशीनों से मार्ग को शीघ्र सुचारु किया गया।
कंडीसौड़ में वनाग्नि का अभ्यास:
ग्राम कंडी के समीप जंगल में आग लगने की घटना का अभ्यास किया गया, जिसमें एक गौशाला के प्रभावित होने का परिदृश्य शामिल था। पशुपालन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर घायल पशु का उपचार किया, जबकि एक पशु की मृत्यु दर्शाई गई।
अभ्यास के दौरान अधिकारियों ने विभिन्न विभागों की त्वरित प्रतिक्रिया, आपसी समन्वय और संसाधनों के उपयोग का बारीकी से मूल्यांकन किया। साथ ही भविष्य में वास्तविक आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक सुझाव भी दिए गए।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी बृजेश भट्ट ने बताया कि इस तरह के मॉक अभ्यास आपदा से निपटने की तैयारियों को मजबूत करने में बेहद कारगर साबित होते हैं और सभी विभागों की कार्यक्षमता को परखने का अवसर प्रदान करते



