एप्लाइड जीनोमिक्स और मॉलेक्युलर डायग्नोस्टिक्स” पर 5-दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन

ऋषिकेश। पंडित ललित मोहन शर्मा परिसर, ऋषिकेश डीएनए लैब (CRIS) देहरादून के तत्वावधान में “New Frontiers in Applied Genomics, Molecular Diagnostics and Advanced Systems in Translational Research in Life Sciences 2026” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला व सम्मेलन एवं संकाय विकास कार्यक्रम (FDP) का आज 25 मार्च 2026 को समापन हुआ I
डीएनए लैब्स की उपनिदेशक डॉ. अंकिता सिंह ने बताया कि प्रतिभागियों ने सम्पूर्ण कार्यशाला में जीनोमिक्स का परिचय और प्रकार, संरचना एवं कार्य, मॉलेक्युलर डायग्नोस्टिक्स की मूल अवधारणाएं, प्रयोगशाला सुरक्षा DNA तकनीक एवं विश्लेष, एडवांस्ड जीनोमिक तकनीकें, मॉलेक्युलर डायग्नोस्टिक्स एप्लीकेशन, डेटा विश्लेषण एवं मूल्यांकन की बारीकियां सीखी, यह कार्यशाला जीव विज्ञान, बायोटेक्नोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी तथा मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी के विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं फैकल्टी के लिए अत्यंत उपयोगी रही । इसका उद्देश्य आधुनिक जीनोमिक तकनीकों और डायग्नोस्टिक टूल्स की सैद्धांतिक व प्रायोगिक समझ विकसित करना था ।
समापन सत्र में मुख्य अतिथि रासबिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय, देहरादून के कुलपति प्रो० हिमांशु ऐरन, ने कहा कि मॉलेक्युलर डायग्नोस्टिक्स आधुनिक चिकित्सा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो जीन स्तर पर रोगों की पहचान करके सटीक उपचार में मदद करता है।
विशिष्ठ अतिथि, भारतीय प्राणी सर्वेक्षण की वैज्ञानिक-F, डॉ अवतार कौर सिधू ने कहा कि यह कार्यशाला वैज्ञानिक अनुसंधान एवं कौशल विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुई। प्रतिभागियों को स्वरोजगार के अवसर ढूंढ कर इस क्षेत्र में अपना रोजगार हेतु कदम उठाना चाहिए।
इस अवसर पर कार्यशाला आयोजन अध्यक्ष निदेशक प्रो गुलशन कुमार ढींगरा ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुये कार्यक्रम में देश के विभिन्न संस्थानों से आए प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता और इसे अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बनाने के सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया।
डीएनए लैब्स के प्रबंध निदेशक डॉ. नरोत्तम शर्मा ने इस परिसर में आयोजित छठवीं कार्यशाला की सफल यात्रा के बारे में बताया व कहा कि विकसित भारत के अभियान के तहत छात्र-छात्राओं को नौकरी लेने वाला नहीं नौकरी देने वाला बनना होगा तभी 2047 में हमारा देश विकसित कहलाएगा I
इस अवसर पर विज्ञान व चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लगभग 26 शिक्षकों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों को प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया। जिसमे राजकीय व निजी उच्च शिक्षण संस्थानों, मेडिकल कॉलेज के सदस्य शामिल थे।
इस कार्यशाला में पोस्टर व मौखिक प्रस्तुतिकरण में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले शोधार्थियों को भी सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि रासबिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हिमांशु ऐरन को चिकित्सा जगत में उत्कृष्ट कार्य के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया व तकनीकी सहयोगी संस्था डीएनए लैब्स को विकसित भारत अभियान के तहत कौशल विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया।
इस कार्यशाला में देश के विभिन्न संस्थाओं से लगभग 130 से अधिक अभ्यर्थियों ने प्रतिभाग किया । इस कार्यशाला को सफल बनाने में मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी विभाग पंडित ललित मोहन शर्मा परिसर ऋषिकेश के समस्त संकाय सदस्यों व कार्मिकों का विशेष योगदान रहा।



