धार्मिक पर्यटन को नई गति देगा उत्तराखंड का बजट: स्वामी रसिक महाराज

रायवाला, 10 मार्च। रायवाला के खांड गांव नंबर-एक स्थित नृसिंह वाटिका आश्रम में मंगलवार को संत-महात्माओं की एक संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी में संत समाज ने उत्तराखंड सरकार द्वारा पेश किए गए बजट का स्वागत करते हुए इसे “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” की भावना वाला बजट बताया। संतों का कहना था कि इस बजट से धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलेगी और प्रदेश के प्राचीन मठ-मंदिरों के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण को बढ़ावा मिलेगा।
सनातन धर्म विकास परिषद उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष एवं नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रस्तुत बजट में “सबका साथ, सबका विकास” की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि बजट में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रावधान अत्यंत सराहनीय हैं। इससे पुराने मठ-मंदिरों का संरक्षण और विकास संभव होगा।
उन्होंने कहा कि भारत की पहचान सनातन संस्कृति और संत परंपरा से जुड़ी है। जब सरकारें धर्म और संस्कृति के संरक्षण के लिए कार्य करती हैं, तो समाज और राष्ट्र दोनों मजबूत होते हैं। मठ-मंदिर हमारी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर हैं, जिनके संरक्षण की दिशा में यह बजट महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
संतों ने मानसखंड मंदिर माला मिशन के द्वितीय चरण में 14 मंदिरों के सुदृढ़ीकरण तथा केदारखंड के प्रमुख धामों—केदारनाथ, मदमहेश्वर, तुंगनाथ, रुद्रनाथ और कल्पेश्वर—में श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाओं के विकास के निर्णय का स्वागत किया। साथ ही महासू देवता हनोल, माणा, टिम्मरसैंण और गुंजी जैसे धार्मिक स्थलों के विकास के लिए बजट प्रावधान किए जाने पर पर्यटन, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज का आभार व्यक्त किया।
नृसिंह वाटिका आश्रम की संचालिका साध्वी मां देवेश्वरी ने कहा कि यह बजट धार्मिक क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे मठ-मंदिरों का जीर्णोद्धार होगा और उनके पौराणिक महत्व का संरक्षण सुनिश्चित होगा। धार्मिक पर्यटन के विस्तार से युवाओं में भी संस्कृति के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होगी।
वहीं स्वामी विवेकानंद गिरी महाराज ने कहा कि सरकार का यह बजट समाज के सभी वर्गों के हित में है। धार्मिक स्थलों के विकास से प्रदेश की आस्था, संस्कृति और पर्यटन को नई मजबूती मिलेगी।
संगोष्ठी में महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद सरस्वती, स्वामी अखंडानंद सरस्वती, स्वामी कृपालु जी महाराज, स्वामी नित्यानंद गिरी, साध्वी प्रज्ञा भारती, संत विशोकानंद गिरी सहित विभिन्न अखाड़ों से जुड़े संत-महात्मा उपस्थित रहे।


