वॉयस मॉड्यूलेशन और एक्सेंट न्यूट्रलाइजेशन से निखरेगा संवाद कौशल : कुलपति प्रो. एन.के. जोशी

श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय में फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यशाला आयोजित
टिहरी गढ़वाल 13 मार्च। श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय में “प्रभावी संप्रेषण के लिए वॉयस मॉड्यूलेशन एवं एक्सेंट न्यूट्रलाइजेशन” विषय पर एक फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों, शोधार्थियों और प्रतिभागियों की संप्रेषण क्षमता को अधिक स्पष्ट, प्रभावी और आत्मविश्वासपूर्ण बनाना था, ताकि वे अपने विचारों और ज्ञान को बेहतर ढंग से प्रस्तुत कर सकें।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एन.के. जोशी ने अपने संदेश में कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक और वैश्विक शैक्षणिक वातावरण में प्रभावी संवाद कौशल अत्यंत आवश्यक है। शिक्षक केवल ज्ञान के स्रोत ही नहीं, बल्कि प्रेरणा के माध्यम भी होते हैं, इसलिए उनकी अभिव्यक्ति स्पष्ट और प्रभावशाली होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों के व्यक्तित्व और शिक्षण शैली को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कुलपति ने फैकल्टी डेवलपमेंट सेंटर की निदेशक एवं गणित विभागाध्यक्ष प्रो. अनीता तोमर के नेतृत्व की सराहना करते हुए आयोजन टीम के सदस्य डॉ. अटल बिहारी त्रिपाठी और डॉ. सीमा बैनिवाल के प्रयासों की भी प्रशंसा की।
फैकल्टी डेवलपमेंट सेंटर की निदेशक प्रो. अनीता तोमर ने कहा कि आधुनिक डिजिटल और वैश्विक युग में प्रभावी संप्रेषण कौशल शिक्षकों और शोधकर्ताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। केवल विषय का ज्ञान पर्याप्त नहीं, बल्कि उसे स्पष्ट और आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वॉयस मॉड्यूलेशन और एक्सेंट न्यूट्रलाइजेशन जैसे कौशल शिक्षण, ऑनलाइन व्याख्यान, वेबिनार और शोध प्रस्तुतियों को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होते हैं।
फैकल्टी डेवलपमेंट सेंटर के उपनिदेशक डॉ. अटल बिहारी त्रिपाठी ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों की प्रस्तुति क्षमता और संवाद दक्षता को सशक्त बनाते हैं तथा उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने विचार प्रभावी ढंग से रखने में सक्षम बनाते हैं।
कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ श्री विशाल वाल्के और श्री वेदांत जोशी ने प्रतिभागियों को वॉयस मॉड्यूलेशन, पिच, टोन, गति, श्वास तकनीक और एक्सेंट न्यूट्रलाइजेशन के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। इंटरैक्टिव सत्रों और व्यावहारिक अभ्यासों के माध्यम से प्रतिभागियों को प्रभावी संवाद और स्पष्ट उच्चारण के महत्व से अवगत कराया गया।
कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. सीमा बैनिवाल ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को संवाद कौशल के व्यावहारिक पहलुओं से परिचित कराना है। कार्यक्रम में परिसर निदेशक प्रो. एम.एस. रावत, पूर्व डीन प्रो. कंचन लता सिन्हा सहित विभिन्न संकायों के डीन, शिक्षक, शोधार्थी और प्रतिभागी उपस्थित रहे।
कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों ने इसे अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक बताया।



