प्रभु के साक्षात्कार से ही कटते हैं जीवन के बंधन: संत दुर्गेश आचार्य

Govind Pundir
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टिहरी गढ़वाल। जनपद के भिंगार्की गांव (पो० आगराखाल) में 29 मार्च से 04 अप्रैल 2026 तक आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का यूट्यूब पर सीधा प्रसारण किया जा रहा है। कथा का वाचन परम पूज्य सद्गुरु ब्रह्म ऋषि राष्ट्रीय संत डॉ. दुर्गेशाचार्य महाराज के श्रीमुख से प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक किया जा रहा है।

सातवें दिन राष्ट्रीय संत दुर्गेश आचार्य ने अपने ओजस्वी आध्यात्मिक प्रवचन में कहा कि जब भगवान का वास्तविक प्रवेश मनुष्य के जीवन में होता है, तब उसके समस्त सांसारिक बंधन स्वतः समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि साधना की पराकाष्ठा वही अवस्था है, जब साधक को समस्त सृष्टि में केवल परमात्मा का ही दर्शन होने लगता है—और यही स्थिति ‘वासुदेव’ भाव की पहचान है।
संत आचार्य ने गूढ़ आध्यात्मिक रहस्य को सरल शब्दों में समझाते हुए कहा कि जब मनुष्य की दृष्टि में देवत्व जागृत होता है, तब उसकी चेतना ‘देवकी’ के स्वरूप में परिवर्तित हो जाती है। उन्होंने कहा कि वासुदेव और देवकी के जीवन चरित्र को आत्मसात करने पर ही भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य मनुष्य के जीवन में संभव होता है।
उन्होंने आगे कहा कि जैसे ही प्रभु का आगमन होता है, वैसे ही जीवन की माया, बंधन और जंजीरें स्वतः टूट जाती हैं। उस अवस्था में इंद्रियां, जो अब तक विषयों के पीछे दौड़ती रहती थीं, पूर्ण विश्राम को प्राप्त हो जाती हैं और अंततः प्रभु में ही लीन हो जाती हैं।
संत दुर्गेश आचार्य ने अत्यंत सुंदर उपमा देते हुए कहा कि जब इंद्रियां प्रभु प्रेम में समर्पित हो जाती हैं, तब यह शरीर स्वयं ‘गोकुल’ बन जाता है और इंद्रिय रूपी ‘गोपियां’ भगवान के प्रेम में रच-बस जाती हैं। ऐसी दिव्य अवस्था में मनुष्य का संपूर्ण जीवन ‘वृंदावन धाम’ का स्वरूप धारण कर लेता है।
उन्होंने वर्तमान भौतिकवादी युग पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि मनुष्य इस दिव्य संदेश को अपने जीवन में उतार ले, तो वह परमानंद ब्रह्म की प्राप्ति कर सकता है और जीवन को सच्चे अर्थों में सफल बना सकता है।

संत के अनुसार, ईश्वर की अनुभूति ही जीवन का परम लक्ष्य है—और जब यह लक्ष्य प्राप्त होता है, तब मन, इंद्रियां और समस्त अस्तित्व प्रभु में विलीन होकर शाश्वत शांति का अनुभव करते हैं।


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*** संक्षिप्त परिचय / बायोडाटा *** नाम: गोविन्द सिंह पुण्डीर संपादक: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल टिहरी। उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार। पत्रकारिता अनुभव: सन 1978 से सतत सक्रिय पत्रकारिता। विशेषता: जनसमस्याओं, सामाजिक सरोकारों, संस्कृति एवं विकास संबंधी मुद्दों पर गहन लेखन और रिपोर्टिंग। योगदान: चार दशकों से अधिक समय से प्रिंट व सोशल मीडिया में निरंतर लेखन एवं संपादन वर्तमान कार्य: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को नई दिशा प्रदान करना।
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