हरिद्वार 23 अगस्त । श्रीजी वाटिका स्थित प्राचीन अवधूत मण्डल आश्रम, ज्वालापुर, हरिद्वार में “एक राष्ट्र, एक चुनाव” विषय पर विशाल संत-समागम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के प्रमुख संत-महात्माओं, राजनेताओं एवं गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लेकर एक साथ चुनाव की व्यवस्था पर अपने विचार व्यक्त किए।
संत-समागम में केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, योगगुरु स्वामी रामदेव, भूमापीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानंद महाराज, सनातन धर्म विकास परिषद उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, भाजपा जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा, बाबा हठयोगी महाराज, स्वामी दयाराम दास जी महाराज, कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम, जूना अखाड़े से स्वामी यतीन्द्रानंद गिरी जी, दिल्ली से दाती महाराज, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद महाराज, स्वामी कल्याण देव महाराज, अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी डॉ. रविन्द्र पुरी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी ललिता नंद गिरी, महामंडलेश्वर करौली शंकर महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी रुपेन्द्र प्रकाश महाराज सहित विभिन्न अखाड़ों के अनेक संत-महात्मा उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद गिरी महाराज ने किया।
योगगुरु स्वामी रामदेव महाराज ने कहा कि देश में बार-बार होने वाले चुनाव विकास कार्यों की गति को प्रभावित करते हैं। प्रधानमंत्री से लेकर राज्यों और स्थानीय निकायों तक लगातार चुनावी प्रक्रिया चलने से प्रशासनिक व्यवस्था, सरकारी संसाधन और जनप्रतिनिधियों की ऊर्जा का बड़ा हिस्सा चुनावों में लग जाता है। उन्होंने कहा कि “एक राष्ट्र, एक चुनाव” देश के लोकतंत्र को अधिक सुदृढ़, सुव्यवस्थित और विकासोन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
स्वामी रामदेव ने कहा कि यदि देश में एक साथ चुनाव होंगे तो समय, धन और प्रशासनिक संसाधनों की व्यापक बचत होगी तथा सरकारें विकास और जनकल्याण के कार्यों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगी। उन्होंने संत समाज से राष्ट्रहित के ऐसे विषयों पर जनजागरण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
सनातन धर्म विकास परिषद उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि “एक राष्ट्र, एक चुनाव” केवल चुनाव सुधार का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्र की स्थिरता, विकास और सुशासन से जुड़ा हुआ विषय है। उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव होने के कारण आचार संहिता लागू होती है और अनेक विकास योजनाओं एवं जनकल्याणकारी कार्यों की गति प्रभावित होती है। यदि लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होंगे तो शासन व्यवस्था को निरंतरता मिलेगी और सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।
स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि संत समाज सदैव राष्ट्रहित, समाजहित और जनकल्याण के विषयों पर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। आज आवश्यकता है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत, पारदर्शी तथा प्रभावी बनाने के लिए सभी राजनीतिक दल और देशवासी व्यापक दृष्टिकोण अपनाएं।
उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र, एक चुनाव से देश में राजनीतिक स्थिरता बढ़ेगी, चुनावी खर्च में कमी आएगी और विकास की योजनाओं को अधिक गति मिलेगी। उन्होंने इसे समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि देशहित में व्यापक सहमति के साथ इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा— बार-बार चुनाव विकास की गति को करते हैं प्रभावित
केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और लोकतंत्र को अधिक मजबूत बनाने के लिए समय-समय पर आवश्यक सुधार किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में लगभग हर समय किसी न किसी राज्य में चुनाव होते रहते हैं, जिससे सरकारों और प्रशासन का ध्यान चुनावी प्रक्रिया की ओर केंद्रित हो जाता है।
उन्होंने कहा कि “एक राष्ट्र, एक चुनाव” से शासन व्यवस्था में स्थिरता आएगी और विकास योजनाओं को गति मिलेगी। देश के संसाधनों का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार, बुनियादी ढांचे और जनकल्याण जैसे क्षेत्रों में अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश के संतों और समाज के प्रबुद्धजनों की सहभागिता से लोकतांत्रिक सुधारों पर सकारात्मक वातावरण बनता है। उन्होंने कहा कि यह विषय किसी एक दल का नहीं, बल्कि राष्ट्रहित और आने वाली पीढ़ियों से जुड़ा हुआ विषय है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा—मजबूत लोकतंत्र और विकास के लिए महत्वपूर्ण पहल
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि “एक राष्ट्र, एक चुनाव” का विचार प्रशासनिक सुगमता, आर्थिक बचत और विकास की निरंतरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि बार-बार चुनाव होने से आदर्श आचार संहिता लागू होती है और प्रशासनिक अधिकारियों तथा सुरक्षा बलों की बड़ी संख्या चुनावी प्रक्रिया में व्यस्त हो जाती है। एक साथ चुनाव होने से इन संसाधनों का बेहतर उपयोग जनहित और राष्ट्रहित के कार्यों में किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड की संत परम्परा सदैव राष्ट्र की एकता, अखण्डता और सांस्कृतिक चेतना की प्रेरणा रही है। मुख्यमंत्री ने उपस्थित संतों से आशीर्वाद प्राप्त करते हुए कहा कि राष्ट्रहित से जुड़े ऐसे विषयों पर संत समाज का मार्गदर्शन देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
संतों ने व्यक्त की व्यापक सहमति
संत-समागम में उपस्थित विभिन्न अखाड़ों और धार्मिक परम्पराओं से जुड़े संत-महात्माओं ने “एक राष्ट्र, एक चुनाव” विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि देश में राजनीतिक स्थिरता, प्रशासनिक सुचारुता और विकास की निरंतरता के लिए इस विषय पर व्यापक राष्ट्रीय विमर्श आवश्यक है।
कार्यक्रम में संत समाज और जनप्रतिनिधियों ने राष्ट्रहित, लोकतंत्र की मजबूती और जनकल्याण के संकल्प के साथ देश के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। विशाल संत-समागम का वातावरण राष्ट्रचिंतन, सामाजिक समरसता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता से ओतप्रोत रहा।




