देहरादून से गैरसैंण की 275 किमी की संकल्प पदयात्रा ने तय किया 125 किमी सफर, मलेथा में उमड़ा जनसमर्थन

Govind Pundir
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टिहरी गढ़वाल 22 अगस्त । स्थायी राजधानी गैरसैंण की मांग को लेकर ‘स्थायी राजधानी गैरसैंण समिति’ की संकल्प पदयात्रा लगातार आगे बढ़ रही है। 15 अगस्त को देहरादून स्थित अस्थायी विधानसभा से शुरू हुई यह पदयात्रा अब तक करीब 125 किलोमीटर का सफर तय कर मलेथा पहुंच चुकी है। पूर्व आईएएस अधिकारी एवं उत्तराखंड शासन के पूर्व सचिव विनोद प्रसाद रतूड़ी के नेतृत्व में चल रही यात्रा का लक्ष्य 275 किलोमीटर की दूरी तय कर गैरसैंण पहुंचना है।
मलेथा में शनिवार को पदयात्रियों का स्थानीय मातृशक्ति और ग्रामीणों ने जोरदार स्वागत किया। इस दौरान महिलाओं का आक्रोश और पहाड़ की पीड़ा खुलकर सामने आई। महिलाओं ने कहा कि राज्य गठन के वर्षों बाद भी पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में पहाड़ की महिलाओं और बुजुर्गों को उपचार के लिए दूरदराज के शहरों का रुख करना पड़ता है।
पदयात्रियों ने कहा कि यात्रा के दौरान रास्ते में आम लोगों से संवाद करने पर पर्वतीय क्षेत्रों की बदहाल स्थिति की तस्वीर लगातार सामने आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि रोजगार के अवसरों की कमी, पलायन, स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं आज भी पहाड़ के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
समिति ने सरकार के रवैये के विरोध में 13 अगस्त को सामूहिक मुंडन कराकर भी अपना विरोध दर्ज कराया था। आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार की कथित संवेदनहीनता के विरोध में उनका संघर्ष अब निर्णायक दौर में पहुंच चुका है। उनका स्पष्ट कहना है कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाए जाने तक आंदोलन जारी रहेगा।
मलेथा से पदयात्रा अब श्रीनगर की ओर रवाना हो गई है। 275 किलोमीटर के लक्ष्य में अभी करीब 150 किलोमीटर की दूरी शेष है। इसके बावजूद आंदोलनकारियों के हौसले बुलंद हैं और वे लगातार पैदल आगे बढ़ रहे हैं।
यात्रा में 76 वर्षीय वयोवृद्ध आंदोलनकारी गोपाल दत्त कुमेड़ी समेत रामेश्वर शर्मा, सुधीर गैरौला, दान सिंह मिंगवाल, नारायण सिंह बिष्ट, विनोद चौहान और दयाल सिंह राणा सहित अन्य आंदोलनकारी शामिल हैं।
समिति ने ऐलान किया है कि पदयात्रा के गैरसैंण पहुंचने के बाद आंदोलन को अनिश्चितकालीन अनशन में तब्दील किया जाएगा। आंदोलनकारियों का कहना है कि गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी घोषित किए जाने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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*** संक्षिप्त परिचय / बायोडाटा *** नाम: गोविन्द सिंह पुण्डीर संपादक: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल टिहरी। उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार। पत्रकारिता अनुभव: सन 1978 से सतत सक्रिय पत्रकारिता। विशेषता: जनसमस्याओं, सामाजिक सरोकारों, संस्कृति एवं विकास संबंधी मुद्दों पर गहन लेखन और रिपोर्टिंग। योगदान: चार दशकों से अधिक समय से प्रिंट व सोशल मीडिया में निरंतर लेखन एवं संपादन वर्तमान कार्य: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को नई दिशा प्रदान करना।
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