टिहरी गढ़वाल 13 अगस्त, 2026 । गढ़रत्न एवं प्रख्यात लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के 77वें जन्मदिवस के अवसर पर बुधवार शाम नई टिहरी स्थित क्रीड़ा भवन में “नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और लोकजीवन” विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में नगर पालिका परिषद नई टिहरी के अध्यक्ष मोहन सिंह रावत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। गोष्ठी में नरेंद्र सिंह नेगी के जीवन, उनके दीर्घ संगीत सफर तथा उत्तराखंड की लोकभाषा, लोककला, लोकसंगीत और पहाड़ी संस्कृति को संरक्षित एवं समृद्ध करने में उनके योगदान पर चर्चा की गई।
नगर पालिका अध्यक्ष मोहन सिंह रावत ने कहा कि नरेंद्र सिंह नेगी के गीत सुनकर उत्तराखंड की कई पीढ़ियां बड़ी हुई हैं। उनके गीतों में गांव के रिश्तों की आत्मीयता के साथ-साथ पहाड़ के कठिन जीवन की वास्तविक तस्वीर भी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि आभासी दुनिया में गांव और पहाड़ का जीवन भले ही बहुत सुंदर दिखाई देता है, लेकिन वास्तविक गांव का जीवन अनेक कठिनाइयों और संघर्षों से भरा है। नेगी जी ने इन वास्तविकताओं को बेहद सहजता से अपने गीतों में उतारा है। उन्होंने कहा कि जब कोई लोकगायक समाज और आमजन की आवाज बन जाता है तो वह लोकगायक से जनगायक बन जाता है।
अपर जिलाधिकारी शैलेन्द्र सिंह नेगी ने कहा कि नरेंद्र सिंह नेगी के गीत उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और सामाजिक जीवन का आईना हैं। कहा कि नेगी जी के गीतों में प्रेम और प्रकृति के साथ पहाड़ की सामाजिक परिस्थितियां, गांवों का जीवन, पलायन और विभिन्न सामाजिक मुद्दे भी प्रमुखता से दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि नेगी जी ने अपने गीतों में जिन मुद्दों को उठाया, उनसे कभी भटके नहीं। यही कारण है कि उनके गीत आम लोगों से सीधे जुड़ते हैं और सुनने वाला महसूस करता है कि यह गीत उसी के जीवन और अनुभवों की बात कर रहा है। कहा कि नेगी जी ने अपने गीतों के माध्यम से पहाड़ के सामान्य जनजीवन, गांव-घर, रिश्तों, प्रेम, प्रकृति, परंपराओं, पलायन और सामाजिक सरोकारों को स्वर दिया। उनके गीत उत्तराखंड के लोगों के जीवन और अनुभवों से इस तरह जुड़े हैं कि श्रोता उनमें अपनी कहानी और अपने आसपास की परिस्थितियों को महसूस करता है।
वक्ताओं ने कहा कि नरेंद्र सिंह नेगी ने गढ़वाली भाषा और उत्तराखंड की लोकधुनों को व्यापक पहचान दिलाने के साथ ही लोकसंस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके गीतों में पहाड़ी बोली, परंपराएं, रीति-रिवाज, लोकजीवन और सामाजिक संवेदनाएं सहज रूप से दिखाई देती हैं। देश-विदेश में रहने वाले उत्तराखंड के लोग भी उनके गीतों के माध्यम से अपनी मिट्टी, गांव और संस्कृति से जुड़े रहते हैं।
गोष्ठी में उपस्थित विभिन्न वक्ताओं ने भी नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों से जुड़े अपने अनुभव और विचार साझा किए तथा उनके योगदान को उत्तराखंड की लोकसंस्कृति के लिए महत्वपूर्ण बताया।
इस अवसर पर नगर पालिका परिषद नई टिहरी के अध्यक्ष मोहन सिंह रावत, अपर जिलाधिकारी शैलेन्द्र सिंह नेगी, उपजिलाधिकारी कमलेश मेहता, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी केशव गैरोला, सीएम थपलियाल, वरिष्ठ पत्रकार एवं रंगकर्मी महिपाल सिंह नेगी, विकास पैन्यूली, प्रीतम सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।





