ईष्ट की भक्ति से होता है कल्याण, डॉ दुर्गेश आचार्य जी महाराज ने केदारनाथ की महिमा का किया वर्णन
टिहरी गढ़वाल । बौराड़ी शहीद स्मारक में आयोजित शिव महापुराण कथा के अंतिम दिन व्यास पीठ से राष्ट्रीय संत डॉ. दुर्गेश आचार्य जी महाराज ने भगवान शिव, विंध्याचल और केदारेश्वर की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपने इष्ट देव की श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा-अर्चना करता है, उसका कल्याण होता है। मनुष्य को अपने इष्ट देव को कभी नहीं भूलना चाहिए।
उन्होंने विंध्याचल पर्वत की कथा सुनाते हुए कहा कि विंध्याचल ने जब भगवान शिव की आराधना करते हुए यज्ञ किया, तब भगवान ओंकारेश्वर प्रकट हुए और विंध्याचल के ऊपर विराजमान हुए। तभी से विंध्याचल की पूजा की परंपरा शुरू हुई।
कथा व्यास ने भगवान केदारेश्वर की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भागीरथी के पवित्र जल से भगवान केदारनाथ को जल अर्पित करने से वे प्रसन्न होते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान केदारनाथ भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार द्वापर युग में पांडवों ने भगवान केदारनाथ के दर्शन एवं आराधना की और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। उन्होंने बताया कि भगवान शिव का सिर पशुपतिनाथ में विराजमान माना जाता है।
एक अन्य प्रसंग में आचार्य महाराज ने कहा कि गंगा और गौ माता हमारी राष्ट्रीय अस्मिता और सनातन संस्कृति की महत्वपूर्ण पहचान हैं। इनके प्रति श्रद्धा और सम्मान बनाए रखना प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। उन्होंने गंगा की स्वच्छता और गौ संरक्षण के लिए समाज को जागरूक होने का संदेश दिया।
इस अवसर पर समिति अध्यक्ष राकेश राणा, कोषाध्यक्ष महावीर प्रसाद उनियाल, गोविंद सिंह पुंडीर, कुलदीप पंवार, टीकम सिंह चौहान, नीलकंठ डिमरी, पंडित राजेंद्र प्रसाद चमोली, सी पी सकलानी, कनिष्ठ प्रमुख विशन सिंह रांगड़ आनंद घिल्डियाल, नित्यानंद बहुगुणा, मनोज शाह, गंगा थपलियाल, रोशन थपलियाल, शैला देवी, कल्पना भट्ट, अंबिका नैथानी, सोनम भंडारी, अनीता थपलियाल, राम देई रावत, सपना कठैत, मंडप आचार्य हेमंत नौटियाल, कृष्ण बालक मिश्रा, राम रमैया भट्ट, कुलदीप नौटियाल, अनिल नौटियाल और कपिल देव उनियाल आदि ने कथा आयोजन में सहभागिता की।




