टिहरी गढ़वाल 17 सितंबर । बौराड़ी शहीद स्मारक में आयोजित शिव महापुराण कथा के चौथे दिन राष्ट्रीय संत डॉ. दुर्गेश आचार्य जी महाराज ने सती चरित्र का विस्तार से वर्णन करते हुए भगवान शिव की उपासना, धार्मिक आचरण और बिल्व वृक्ष की महिमा पर प्रकाश डाला। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
डॉ. आचार्य ने कहा कि भगवान शिव की आराधना में भस्म, त्रिपुंड, रुद्राक्ष और बिल्व पत्र का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि त्रिपुंड और भस्म धारण करने से व्यक्ति में शुद्धता और शिव भक्ति का भाव जागृत होता है। संध्या काल में भगवान की पूजा-अर्चना करने और बच्चों को भी धार्मिक संस्कार देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अरुणोदय काल में उठकर अपने दिन की शुरुआत करनी चाहिए।
बिल्व वृक्ष की महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि बिल्व वृक्ष भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। बिल्व की जड़ में जल अर्पित कर उसका छींटा मुख पर लगाने से मनुष्य पुण्य और निर्मलता का भागी बनता है। उन्होंने कहा कि बिल्व वृक्ष के नीचे ब्राह्मण को भोजन कराने का भी विशेष धार्मिक महत्व है और इससे पुण्य की प्राप्ति होती है।
उन्होंने गृहस्थ जीवन में पंचदेव उपासना के महत्व पर भी प्रकाश डाला। वहीं रुद्राक्ष की महिमा बताते हुए उन्होंने इसे आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया। प्रवचन के दौरान उन्होंने छह मुखी रुद्राक्ष से संबंधित धार्मिक मान्यताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे धारण करने से साधक को आध्यात्मिक लाभ मिलता है।
कथा के दौरान भगवान शिव और माता सती के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से कथा का श्रवण किया।
इस अवसर पर समिति कोषाध्यक्ष महावीर प्रसाद उनियाल, गोविंद सिंह पुंडीर, टीकम सिंह चौहान, बिशन सिंह रांगड़, नीलकंठ डिमरी, आनंद घिल्डियाल, नित्यानंद बहुगुणा, सतीश थपलियाल, मनोज शाह, आनंदमणि पैन्यूली, रोशन थपलियाल, द्वारिका प्रसाद भट्ट, शैला देवी, कल्पना भट्ट, अंबिका नैथानी, सोनम भंडारी, अनीता थपलियाल, राम देई रावत, सपना कठैत, आचार्य हेमंत नौटियाल सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।




