इंडीया गांव के काश्तकारों ने जनता दरबार में उठाई आवाज, जमीन वापस करने या मुआवजा देने की मांग
नई टिहरी। टिहरी बांध परियोजना के लिए करीब 45 वर्ष पूर्व अधिग्रहित की गई भूमि का मुआवजा नहीं मिलने से राजस्व ग्राम इंडीया, पट्टी सारजुला के ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों ने जनता दरबार में पुनर्वास निदेशक एवं जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल को ज्ञापन सौंपकर अधिग्रहित भूमि वापस करने अथवा उसका उचित मुआवजा दिलाने की मांग की।
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 1980-81 में टिहरी बांध परियोजना के लिए सिंचाई विभाग ने ग्राम इंडीया की भूमि अधिग्रहित की थी, लेकिन आज तक संबंधित काश्तकारों को मुआवजे के रूप में एक भी रुपया नहीं मिला। ग्रामीणों का कहना है कि अधिग्रहित भूमि का परियोजना के लिए उपयोग भी नहीं किया गया। वर्ष 2015 में टीएचडीसी की ओर से उक्त भूमि ग्रामीणों को वापस करने के संबंध में पत्र भी जारी किया गया था, लेकिन इसके बावजूद न तो भूमि वापस की गई और न ही काश्तकारों को मुआवजा मिला।
ग्रामीणों ने बताया कि संबंधित भूमि आज भी काश्तकारों के कब्जे और काश्त में है। ऐसे में उन्होंने प्रशासन से भूमि वापस दिलाने की मांग की है। वहीं, जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन और टीएचडीसी के अधिकारियों की संयुक्त समिति गठित कर जांच कराने तथा समस्या का शीघ्र समाधान करने का आश्वासन दिया।
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि टीएचडीसी की ओर से इसी भूमि को टिहरी मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए प्रस्तावित किया गया है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि जब तक अधिग्रहित भूमि का नियमानुसार मुआवजा काश्तकारों को नहीं दिया जाता, तब तक इस भूमि को मेडिकल कॉलेज के लिए हस्तांतरित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने पहले भूमि का स्वामित्व और मुआवजे का मामला स्पष्ट करने की मांग उठाई है।
ज्ञापन देने वालों में रणजीत सिंह नेगी, जगजीत सिंह नेगी, विजय सिंह नेगी, राजेंद्र सिंह, सरस्वती नेगी, महावीर सिंह, विमला देवी, दरमियांन सिंह सहित अनेक ग्रामीण शामिल रहे।
45 साल बाद भी नहीं मिला जमीन का मुआवजा, अब मेडिकल कॉलेज के लिए भूमि देने पर उठे सवाल

*** संक्षिप्त परिचय / बायोडाटा *** नाम: गोविन्द सिंह पुण्डीर संपादक: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल टिहरी। उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार। पत्रकारिता अनुभव: सन 1978 से सतत सक्रिय पत्रकारिता। विशेषता: जनसमस्याओं, सामाजिक सरोकारों, संस्कृति एवं विकास संबंधी मुद्दों पर गहन लेखन और रिपोर्टिंग। योगदान: चार दशकों से अधिक समय से प्रिंट व सोशल मीडिया में निरंतर लेखन एवं संपादन
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