टिहरी गढ़वाल 19 सितम्बर। बौराड़ी शहीद स्मारक में चल रही शिव महापुराण कथा के छठे दिन कथा व्यास डॉ. दुर्गेश आचार्य जी महाराज ने भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का प्रसंग सुनाया। इस दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं को मन, बुद्धि, चित्त और इंद्रियों पर नियंत्रण रखने का संदेश दिया।
कथा के दौरान उत्तराखंड सरकार के अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष खेम सिंह चौहान ने व्यास पीठ पर पहुंचकर कथा व्यास डॉ. दुर्गेश आचार्य जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया।
डॉ दुर्गेश आचार्य जी महाराज ने कश्यप ऋषि की 13 पत्नियों और राजा दशरथ की तीन रानियों के प्रसंग के माध्यम से मन, बुद्धि और चित्त के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि मन चंचल होता है और चित्त को भगवान में लगाने से मन को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है। चित्त में जैसे संस्कार होते हैं, बुद्धि भी उसी के अनुरूप कार्य करती है।
उन्होंने तारकासुर के प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि उसका वध भगवान शिव के पुत्र द्वारा ही किया जाना संभव था। इसके साथ ही हिमालय और उनकी पुत्रियों गंगा तथा पार्वती के प्रसंग का भी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि गंगा भगवान शिव की जटाओं में विराजमान हुईं और पार्वती का विवाह भगवान शिव से हुआ।
डॉ. आचार्य ने श्रद्धालुओं से नियमित रूप से सूर्य नमस्कार करने और आयुर्वेदिक पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए प्लास्टिक और पॉलीथिन का प्रयोग कम करने तथा इनके स्थान पर पर्यावरण हितैषी विकल्प अपनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि महापुरुषों और गुरुओं का सम्मान करना चाहिए। कथा के दौरान उन्होंने गौ संरक्षण का संदेश देते हुए गौ माता की सेवा और रक्षा का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गाय के दूध से हमारा पालन-पोषण होता है, इसलिए गौ संरक्षण समाज की जिम्मेदारी है। कथा में गंगा और भगवान शिव से जुड़े विभिन्न धार्मिक प्रसंगों के साथ बदरीनाथ धाम का भी उल्लेख किया गया।
इस अवसर पर राज्य मंत्री श्री खेम सिंह चौहान, समिति अध्यक्ष राकेश राणा, कोषाध्यक्ष महावीर प्रसाद उनियाल, गंगा भगत सिंह नेगी, गोविंद सिंह पुंडीर, धन सिंह चौहान, टीकम सिंह चौहान, नीलकंठ डिमरी, आनंद घिल्डियाल, सतीश थपलियाल, नित्यानंद बहुगुणा, मनोज शाह, लक्ष्मण सिंह रावत, रोशन थपलियाल, शैला देवी, गुड्डी देवी चौहान , कल्पना भट्ट, अंबिका मैठाणी, सोनम भंडारी, अनीता थपलियाल, राम देई रावत और सपना कठैत सहित मंडप आचार्य हेमंत नौटियाल, कृष्ण बालक मिश्रा, राम रमैया भट्ट, कुलदीप नौटियाल, अनिल नौटियाल और कपिल देव उनियाल आदि मौजूद रहे।




