रायवाला, 11 अक्टूबर। शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर रविवार को माँ भगवती के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की पूजा-अर्चना के साथ अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस का भी विशेष संयोग रहा। इस अवसर पर नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज, अध्यक्ष सनातन धर्म विकास परिषद उत्तर प्रदेश (कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त) ने सभी बालिकाओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की।
स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति में नारी को शक्ति, श्रद्धा, करुणा और सृजन का प्रतीक माना गया है। नवरात्रि में माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना हमें नारी शक्ति के सम्मान और उसके महत्व का संदेश देती है। ऐसे पावन अवसर पर अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस का होना समाज के लिए विशेष प्रेरणादायक है।
उन्होंने कहा कि बालिकाएँ देश का भविष्य और समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनके सम्मान, शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता को सुनिश्चित करना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। जिस समाज में बेटियों को समान अवसर, उचित शिक्षा और आगे बढ़ने का प्रोत्साहन मिलता है, वही समाज वास्तविक प्रगति की ओर अग्रसर होता है।
स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि केवल नवरात्रि में कन्या पूजन करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बेटियों के प्रति सम्मान और समानता का भाव हमारे व्यवहार तथा सामाजिक व्यवस्था में भी दिखाई देना चाहिए। प्रत्येक परिवार को बेटियों के सपनों को साकार करने में सहयोग करना चाहिए और समाज को बालिका शिक्षा, महिला सम्मान तथा नारी सशक्तीकरण के लिए निरंतर प्रयास करने चाहिए।
उन्होंने माँ भगवती से प्रार्थना की कि सभी बालिकाओं का जीवन सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और सफलता से परिपूर्ण हो तथा वे शिक्षा, संस्कार और आत्मविश्वास के बल पर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँ।
स्वामी रसिक महाराज ने संदेश दिया कि बेटियाँ केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की शक्ति हैं। उनका सम्मान, उनकी सुरक्षा और उनका सशक्तीकरण ही एक समृद्ध, संस्कारित एवं विकसित भारत की सच्ची पहचान है।




