भागवत कथा में बालक उतथ्य और सत्यव्रत की कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को दिया सत्य एवं करुणा का संदेश
चमोली । राष्ट्रीय संत डॉ. दुर्गेश आचार्य महाराज ने देवी भागवत कथा के दौरान कहा कि मां पराम्बा का दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए सत्य, करुणा और सदाचार को जीवन में अपनाना आवश्यक है। बच्चों को बचपन से ही सत्य बोलने, जीवों पर दया करने और वृद्धजनों की सेवा करने के संस्कार देने चाहिए। इन सद्गुणों से जीवन में सुख, शांति और खुशहाली आती है।
कथा प्रसंग में उन्होंने बालक उतथ्य की कथा सुनाते हुए बताया कि किस प्रकार मां की शरण में जाकर सत्य बोलने का संकल्प लेने वाला बालक सत्यव्रत के नाम से विख्यात हुआ। एक निरीह पशु को बाण से घायल देखकर उसके मन में करुणा जागी और उसने पशु को मारने वाले के प्रति क्षोभ व्यक्त किया। महाराज ने बताया कि मां सरस्वती की कृपा से वाणी में सामर्थ्य आती है और भक्त को ज्ञान प्राप्त होता है।
डॉ. आचार्य ने कहा कि बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करना परिवार और समाज की जिम्मेदारी है। सत्य बोलने, प्राणिमात्र के प्रति दया रखने तथा माता-पिता और वृद्धजनों की सेवा करने से व्यक्ति का जीवन संस्कारित बनता है। ऐसे सद्गुणों को अपनाकर मनुष्य ईश्वर की कृपा का पात्र बन सकता है।




