सरकारी जमीनों के हस्तांतरण में पारदर्शिता जरूरी, जनता के सामने रखें पूरी जानकारी: राकेश राणा

Govind Pundir
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UIIDB के अधीन 1,080 एकड़ भूमि लाने की प्रक्रिया पर उठाए सवाल, पटवा डांगर, अलकनंदा होटल और जॉर्ज एवरेस्ट संपत्तियों के मूल्यांकन का मांगा ब्योरा

देहरादून। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव राकेश राणा ने उत्तराखंड की सरकारी भूमि और महत्वपूर्ण सार्वजनिक संपत्तियों के प्रबंधन एवं हस्तांतरण को लेकर धामी सरकार से पारदर्शिता बरतने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सरकारी जमीनों को निजी हाथों में सौंपने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिससे प्रदेश के सार्वजनिक हितों और भविष्य में इन संसाधनों के उपयोग को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
राणा ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न विभागों की करीब 1,080 एकड़ भूमि को उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (UIIDB) के अधीन लाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। सरकारी जमीन प्रदेश की जनता की संपत्ति है और इसके उपयोग अथवा हस्तांतरण से जुड़े फैसले सार्वजनिक हितों को ध्यान में रखकर ही किए जाने चाहिए।
उन्होंने पटवा डांगर की लगभग 14 एकड़ भूमि, अलकनंदा होटल और जॉर्ज एवरेस्ट जैसी महत्वपूर्ण संपत्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके मूल्यांकन, आवंटन की शर्तों और निजी संस्थाओं को दिए जाने वाले अधिकारों की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। विशेष रूप से ऐतिहासिक महत्व की जॉर्ज एवरेस्ट संपत्ति के मामले में सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आवंटन किन शर्तों पर किया गया है और इससे प्रदेश को क्या आर्थिक एवं सामाजिक लाभ मिलेगा।
राणा ने कहा कि निवेश आकर्षित करना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार, छोटे उद्यमियों को अवसर और प्रदेश के मूल निवासियों के हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होनी चाहिए। सरकारी संपत्तियों का उपयोग इस तरह किया जाना चाहिए, जिससे पर्यटन, स्थानीय उद्योग और रोजगार को बढ़ावा मिले तथा पलायन रोकने में मदद मिले।
उन्होंने नवंबर 2022 में आयोजित चिंतन शिविर के बाद UIIDB के माध्यम से सरकारी भूमि के प्रबंधन और निवेश संबंधी निर्णयों की व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि भूमि से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में जनप्रतिनिधियों और आम जनता की निगरानी तथा भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
राकेश राणा ने सरकार से सवाल किया कि 1,080 एकड़ भूमि को UIIDB के अधीन लाने का आधार और उद्देश्य क्या है? क्या इन संपत्तियों का स्वतंत्र एजेंसी से बाजार मूल्यांकन कराया गया है? निजी संस्थाओं को भूमि अथवा संपत्तियां देने की शर्तें क्या हैं और इससे होने वाले लाभ में स्थानीय लोगों की हिस्सेदारी कैसे सुनिश्चित की जाएगी? उन्होंने भूमि आवंटन, टेंडर प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य का गठन जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय जनता के अधिकारों की रक्षा की भावना के साथ हुआ था। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि सार्वजनिक संपत्तियों का उपयोग प्रदेश के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखकर करे। प्रदेश का युवा रोजगार के लिए पलायन करने को मजबूर है, इसलिए निवेश की योजनाओं में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
राणा ने मांग की कि सरकार भूमि हस्तांतरण से जुड़े सभी तथ्यों और दस्तावेजों को सार्वजनिक करे तथा संपत्तियों का स्वतंत्र एवं पारदर्शी मूल्यांकन सुनिश्चित करे। यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण के मुद्दे को जनता के बीच उठाएगी और जरूरत पड़ने पर आंदोलन भी करेगी।
उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन किसी सरकार की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की धरोहर है। इसके उपयोग और हस्तांतरण से जुड़े हर निर्णय में उत्तराखंड की जनता का हित सर्वोपरि होना चाहिए।

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*** संक्षिप्त परिचय / बायोडाटा *** नाम: गोविन्द सिंह पुण्डीर संपादक: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल टिहरी। उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार। पत्रकारिता अनुभव: सन 1978 से सतत सक्रिय पत्रकारिता। विशेषता: जनसमस्याओं, सामाजिक सरोकारों, संस्कृति एवं विकास संबंधी मुद्दों पर गहन लेखन और रिपोर्टिंग। योगदान: चार दशकों से अधिक समय से प्रिंट व सोशल मीडिया में निरंतर लेखन एवं संपादन वर्तमान कार्य: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को नई दिशा प्रदान करना।
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