रामधुन के साथ गांधी का चिंतन सात दिवसीय व्याख्यानमाला का समापन

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गढ़ निनाद समाचार * 2 अक्टूबर

देवप्रयाग: राजकीय महाविद्यालय देवप्रयाग में सात दिवसीय “महात्मा गांधी का चिंतन” विषय पर व्याख्यानमाला का समापन गांधी जयंती के अवसर पर हुआ। इस अवसर पर महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धासुमन अर्पित किए गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ0 अर्चना धपवाल और मंच का संचालन डॉ0 एम एन नौटियाल द्वारा किया गया।

राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी एवं व्याख्यानमाला के संयोजक डॉ0 अशोक कुमार मेंदोला ने इस अवसर पर कहा हम सभी जानते हैं कि महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता कहकर संबोधित किया जाता है, लेकिन बहुत कम लोग इस बात को जानते हैं कि उन्हें यह उपाधि किसने दी थी? महात्मा गांधी को पहली बार सुभाष चंद्र बोस ने ‘राष्ट्रपिता’ कहकर संबोधित किया था। 4 जून 1944 को सिंगापुर रेडिया से एक संदेश प्रसारित करते हुए ‘राष्ट्रपिता’ महात्मा गांधी कहा था।

कवि और नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर ने गांधीजी को महात्मा की उपाधि दी थी। डॉक्टर मेंदोला ने सात दिवसीय स्वर्गीय आचार्य चक्रधर जोशी व्याख्यानमाला के अंतर्गत महात्मा गांधी का चिंतन विषय की सात दिवसीय आख्या प्रस्तुत की।
इस अवसर पर डॉ0 नौरियाल ने अपने संबोधन में कहा कि गांधी जी एवं शास्त्री जी के जीवन में समानता दिखाती हैं। दोनों महानुभावों के द्वारा भारत एवं विश्व की स्तर पर दिए गए योगदान को बताया गया। डॉ0 अर्चना द्वारा गांधी दर्शन पर विस्तार पूर्वक व्याख्यान देते हुए विश्व स्तर पर उनके प्रभाव को छात्र-छात्राओं के सामने रखा।

इस अवसर पर डॉ0 दिनेश कुमार टम्टा, डॉ0 रंजू उनियाल , डॉ0 लीना पुंडीर, डॉ0 शीतल, डॉ0 पारुल रतूड़ी, निकिता चौहान, विनोद सिंह राणा, राजू, अर्जुन, मेहताब सिंह एवं छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।


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