विराट हिंदू सम्मेलन में हिंदू समाज को जागृत करने का आह्वान

स्वरोजगार से जुड़े 22 लोगों को किया सम्मानित
टिहरी गढ़वाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर सकल हिंदू समाज, नई टिहरी द्वारा आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को लेकर समाज को जागृत करने पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि पृथ्वी, जल, आकाश, वायु और अग्नि की उपासना करने वाली सभ्यता ही हिंदू है और हिंदू ही सनातन है, जिसकी न कोई शुरुआत है और न अंत।
रविवार को सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के मैदान में डॉ. सिद्धि मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन का शुभारंभ जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी स्वरूपानंद यति, आरएसएस के प्रांत प्रचार प्रमुख संजय तथा वक्ता डॉ. स्मृति थपलियाल द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। इससे पूर्व माधव कुंज स्थित आरएसएस कार्यालय से कार्यक्रम स्थल तक पारंपरिक ढोल-दमाऊ के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली गई।
सम्मेलन के मुख्य वक्ता महामंडलेश्वर स्वामी स्वरूपानंद यति ने कहा कि हिमालय से इंदु सागर के बीच रहने वाला ही हिंदू है और हिंदू धर्म एक अनंत सभ्यता का प्रतीक है। उन्होंने पंच परिवर्तन को जीवन के लिए आवश्यक बताते हुए कहा कि इसका पहला चरण ‘स्व-बोध’ है। उन्होंने प्रतिदिन सूर्य को जल अर्पित कर दिन की शुरुआत करने, भगवान गणपति की पूजा तथा बच्चों को तिलक लगाने की परंपरा अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने जन्मदिन पर केक काटने के बजाय पौधरोपण करने, हिम प्रदेश को समृद्ध बनाने, चीड़ के स्थान पर उपयोगी प्रजातियों के वृक्ष लगाने और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने पर जोर दिया।
आरएसएस के प्रांत प्रचार प्रमुख संजय ने संघ के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत चलाए जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि फरवरी माह में पूरे प्रदेश में लगभग एक हजार हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जिनमें टिहरी जिले के 35 स्थान शामिल हैं। उन्होंने कहा कि संघ शिक्षा, स्वास्थ्य, कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, जल प्रबंधन, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्यों के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रहा है।
वक्ता डॉ. स्मृति थपलियाल ने कहा कि सनातन धर्म हमें गौरवान्वित करता है। उन्होंने लक्ष्मीबाई, जीजाबाई, रानी कर्णावती और दुर्गावती जैसी वीरांगनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि नारी आज हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
अध्यक्ष डॉ. सिद्धि मिश्रा ने कहा कि कुटुंब प्रबोधन और ‘स्व’ की भावना व्यक्ति के जीवन का आधार है। उन्होंने चिंता जताई कि अन्य देश हमारी परंपराओं को अपनाकर उन्हें अपने ब्रांड नाम से प्रस्तुत कर रहे हैं, जबकि हम अपने मूल्यों को भूलते जा रहे हैं।
सम्मेलन में स्वरोजगार से जुड़े समाज के 22 लोगों को भारत माता का चित्र और पटका पहनाकर सम्मानित किया गया। साथ ही विद्या मंदिर, शिशु मंदिर, एकल विद्यालय तथा कंप्यूटर प्रशिक्षण से जुड़े विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। पंच परिवर्तन विषय पर आधारित प्रदर्शनी भी सम्मेलन का आकर्षण रही।



