ब्रेकिंग: सिडकुल सूटकेस हत्याकांड में उम्रकैद, मुख्य आरोपी को आजीवन कारावास

तेजतर्रार जांच का नतीजा: तत्कालीन थाना प्रभारी लखपत सिंह बुटोला की अगुवाई में सुलझा चर्चित मर्डर केस
इश्क, शक और कत्ल: 2020 के चर्चित हत्याकांड में अदालत का कड़ा रुख
हरिद्वार। जनपद के सिडकुल क्षेत्र में वर्ष 2020 में हुए बहुचर्चित लिव-इन संबंध हत्याकांड में अदालत ने कड़ा फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी को आजीवन कारावास की सजा दी है। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने आरोपी रोहित को सश्रम आजीवन कारावास और 30 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया, जबकि सह-अभियुक्ता मंजू को साक्ष्य छिपाने के अपराध में पांच वर्ष के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
सूटकेस में मिला था युवती का शव
मामला सिडकुल थाना क्षेत्र का है। रोहित और सोनम उर्फ वर्षा एक फैक्ट्री में साथ काम करते थे और शिवनगर कॉलोनी में लिव-इन संबंध में रह रहे थे। उसी मकान में मंजू भी किराए पर रहती थी।
24 मई 2020 की रात संदिग्ध परिस्थितियों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। तलाशी में कमरे के बाथरूम से एक सूटकेस बरामद हुआ, जिसमें युवती का शव छिपाकर रखा गया था। इस बरामदगी से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी।
संबंधों में तनाव बना हत्या की वजह
शासकीय अधिवक्ता के अनुसार जांच में सामने आया कि रोहित के दोनों युवतियों से संबंध थे, जिसे लेकर आए दिन विवाद होता था। इसी तनाव के चलते रोहित ने मंजू के साथ मिलकर युवती की हत्या की और बाद में शव को सूटकेस में छिपाकर साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया।
* तत्कालीन थाना प्रभारी की अहम भूमिका *
मामले के खुलासे में तत्कालीन सिडकुल थाना प्रभारी लखपत सिंह बुटोला की भूमिका निर्णायक रही। उन्होंने शुरुआती जांच से ही मामले को गंभीरता से लेते हुए अलग-अलग पुलिस टीमों का गठन किया और तकनीकी व भौतिक साक्ष्य जुटाने पर जोर दिया।
कोरोना काल की कठिन परिस्थितियों के बावजूद पुलिस टीम ने लगातार दबिश दी। मुख्य आरोपी की लोकेशन ट्रेस कर उसे कौशांबी क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया, जबकि मंजू को पहले ही डेंसो चौक क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया गया था। गिरफ्तारी के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
वर्तमान में लखपत सिंह बुटोला जनपद के हिंडोलाखाल थाने में थाना प्रभारी के रूप में तैनात हैं।
12 गवाहों और पुख्ता साक्ष्यों पर आधारित फैसला
अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 12 गवाह पेश किए गए। दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने रोहित को हत्या और साक्ष्य छिपाने का दोषी करार दिया, जबकि मंजू को साक्ष्य छिपाने का अपराधी ठहराया।
इस चर्चित प्रकरण में पुलिस की तत्परता, तकनीकी जांच और मजबूत साक्ष्यों ने न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अदालत के फैसले से पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद पूरी हुई है और यह संदेश गया है कि गंभीर अपराधों में कानून का शिकंजा अंततः कसता ही है।



