आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का काला अध्याय : स्वामी रसिक महाराज

Govind Pundir
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लखनऊ 25 जून । आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ पर सनातन धर्म विकास परिषद उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष, कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त एवं नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक काला अध्याय था। इस अवधि में देशवासियों के मौलिक अधिकारों का हनन हुआ, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाए गए तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास किया गया।

स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि लोकतंत्र केवल एक शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। आपातकाल की घटनाएं हमें यह सीख देती हैं कि सत्ता चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, उसे संविधान और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के दायरे में रहकर ही कार्य करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि युवा पीढ़ी देश के लोकतांत्रिक इतिहास को जाने और संविधान के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझे। लोकतंत्र की मजबूती ही राष्ट्र की एकता, अखंडता और प्रगति की आधारशिला है।

स्वामी रसिक महाराज ने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सभी लोकतंत्र सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि उनका त्याग और बलिदान सदैव देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा।

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*** संक्षिप्त परिचय / बायोडाटा *** नाम: गोविन्द सिंह पुण्डीर संपादक: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल टिहरी। उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार। पत्रकारिता अनुभव: सन 1978 से सतत सक्रिय पत्रकारिता। विशेषता: जनसमस्याओं, सामाजिक सरोकारों, संस्कृति एवं विकास संबंधी मुद्दों पर गहन लेखन और रिपोर्टिंग। योगदान: चार दशकों से अधिक समय से प्रिंट व सोशल मीडिया में निरंतर लेखन एवं संपादन वर्तमान कार्य: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को नई दिशा प्रदान करना।
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